सरकारी खरीद में हो रही औपचारिकता
उत्तराखंड में दाम अधिक होने के चलते गेहूं जिले से बाहर जा रहा है। इससे मंडियों में आवक घट रही है। बृहस्पतिवार को मंडी में मात्र 11 हजार क्विंटल आवक हुई। यानी सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद की औपचारिकता निभाई जा रही है।
जिले को 3.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य मिला है। इसके लिए 89 क्रय केंद्र खोले गए हैं। मगर व्यवस्थाएं पूर्ण न होने और खुले बाजार का भाव सरकारी रेट के आसपास होने के चलते किसान क्रय केंद्रों के प्रति आकर्षित नहीं हो रहे हैं। वहीं पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के खुले बाजार में गेहूं के दाम बिेहतर होने के चलते बड़ी संख्या में किसान अपना गेहूं उत्तराखंड ले जा रहे हैं। इसका असर मंडी की आढ़तों पर आने वाले गेहूं पर पड़ने लगा है। बृहस्पतिवार को पीलीभीत की मंडी में मात्र 11 हजार क्विंटल की आवक दर्ज की गई जबकि पिछले दिनों आवक 15 हजार क्विंटल तक पहुंच गई थी। उधर सरकारी क्रय केंद्रों पर अधिकारियों की दौड़ भाग एवं निरीक्षण का असर होता नहीं दिख रहा है। क्रय केंद्रों पर खरीद के नाम पर मात्र औपचारिकता निभाई जा रही है। जिले में अभी तक पांच हजार मैट्रिक टन गेहूं भी नहीं खरीदा जा सका है।
खाद्य विभाग ने खरीदा 540 एमटी गेहूं
जिले में गेहूं खरीद का जिम्मा खाद्य विभाग को सौंपा गया है लेकिन खुद इस विभाग की खरीद ही पीछे है। विभाग को सर्वाधिक 95 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य मिला है जिसके सापेक्ष 13 दिन में मात्र 540 मैट्रिक टन ही गेहूं की खरीद की है। वहीं नेफेड ने मात्र 53 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है।