जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए निर्धारित समय सीमा को दिसंबर-2017 से बढ़ाकर अक्तूबर-2018 कर दिया गया है लेकिन बजट की उपलब्धता और कार्य की गति को देखते हुए लक्ष्य हासिल होना मुश्किल लग रहा है। जिले में 1.48 लाख शौचालय बनने हैं जिसके लिए 177 करोड़ रुपये चाहिए लेकिन अब तक मात्र 16 करोड़ रुपये ही प्राप्त हो सका है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए पहले 1.63 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य 31 दिसंबर 2017 तक रखा गया था। बाद में हुए सर्वे में कई लाभार्थियों के शौचालय बने निकले जबकि कुछ के बन रहे थे। इन कम करने के बाद जिले को ओडीएफ करने के लिए 1.48 लाख शौचालयों की जरूरत है। संख्या कम होने के साथ ही इसकी समय सीमा बढ़ाकर दो अक्तूबर 2018 कर दी गई है। निर्धारित समय मे शौचालयों को निर्माण कराने के लिए 177 करोड़ रुपये की धनराशि की जरूरत है लेकिन अभी तक मात्र 16 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। इस धनराशि से 10 हजार शौचालयों के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है जिससे लगभग 8846 बन चुके हैं जबकि कुछ पर काम चल रहा है। इसके अलावा शेष धनराशि से अब जंगल किनारे के 99 गांव को ओडीएफ करने की योजना तैयार की गई और इसके लिए 3572 लाभार्थियों के खातों में धनराशि भेजी जा रही है। इनका निर्माण 31 जुलाई तक पूूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। बरसात का मौसम और रेत, मोंरग सहित कई सामान की उपलब्धता न होने के कारण निर्माण में दिक्कत आ रही है।
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अब लाभार्थी के खाते में जाएगी धनराशि
ओडीएफ के लिए अभी तक सीधे ग्राम पंचायतों को धनराशि आवंटित की जा रही थी लेकिन इसमें बंदरबांट और भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर डीएम ने धन आवंटन में बदलाव किया है। अब लाभार्थी के खाते में धनराशि भेजी जाएगी जो उसे दो किस्तों में मिलेगी। पहली काम शुरू होने के बाद और दूसरी काम पूरा होने के बाद।
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प्रधानों की कम हुई दिलचस्पी
ओडीएफ के लिए अभी तक ग्राम पंचायतों में धनराशि जाती थी जिससे प्रधान और सचिव के माध्यम से शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा था लेकिन अब धनराशि सीधे लाभार्थी के खाते में जाने से प्रधानों की दिलचस्पी कम हो गई है।
जंगल किनारे गांव को मिली प्राथमिकता
जिले में पिछले दिनों बाघ के हमले की घटनाएं बढ़ने पर डीएम ने जंगल किनारे के गांव को पहले ओडीएफ करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद वन विभाग के माध्यम से जंगल किनारे के गांव की सूची प्राप्त कर 99 गांव को चयनित किया गया है। इन गांव के ओडीएफ होने के बाद शेष गांव में निर्माण कराया जाएगा।
सांसद आदर्श गांव भी ओडीएफ नहीं
जिले के पहले सांसद आदर्श गांव गुलड़िया भूपसिंह को ओडीएफ करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से 243 शौचालय बनवाए जा चुके हैं। प्रशासन का प्रयास है कि सक्षम लोग अपने स्तर से शौचालय का निर्माण कराएं लेकिन प्रधान की ओर से अभी भी 600 शौचालयों निर्माण के लिए धनराशि की मांग की गई है। इससे सांसद आदर्श गांव भी अब तक ओडीएफ नहीं हो सका है।