पीलीभीत। आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति मिलने के फैसले के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के डॉक्टरों ने हड़ताल कर विरोध जताया। राष्ट्रीय आह्वान पर की गई हड़ताल के तहत सुबह छह बजे से लेकर शाम छह बजे तक क्लीनिक, डिस्पेंसरी और अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद रखी गई। केवल आपातकालीन चिकित्सा और कोविड से जुड़ी उपचार सेवाएं ही जारी रहीं। चिकित्सीय सेवा बंद होने पर मरीजों और तीमारदारों को काफी भटकना पड़ा। उधर, मरीजों को राहत देने के लिए नीमा के डॉक्टरों ने क्लीनिक खोलकर मरीजों का मुफ्त इलाज किया। आईएमए की हड़ताल का ही असर रहा कि शुक्रवार को जिला अस्पताल में एकाएक मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां बता दें कि जिले में आईएमए और नीमा से जुड़े डॉक्टरों की संख्या लगभग बराबर-बराबर है।
जनपद में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े 80 डॉक्टर हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति मिलने से आईएमए के डॉक्टरों में खासी नाराजगी है। आईएमए के देशव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रखने का निर्णय लिया गया था। इसका असर जनपद में भी देखने को मिला। आईएमए से जुड़े सभी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर की ओपीडी सेवाएं दिन भर ठप रहीं। अचानक हुई इस हड़ताल से दूर दराज इलाकों से इलाज कराने पहुंचे मरीज और तीमारदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई अस्पतालों के बाहर मरीजों के तीमारदार अस्पताल कर्मियों से मरीजों को देखने को लेकर विनती तक करते देखे गए। ऐसे में अधिक दिक्कत होने पर कई तीमारदारों ने अपने मरीजों को जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। इससे पूरे दिन जिला अस्पताल में भीड़ उमड़ी रही।
दिन भर अस्पतालों के पास भटकते रहे मरीज
पूरे दिन अस्पतालों के पास भीड़ भाड़ देखने को मिली। दूर दराज से आए मरीज और तीमारदार गांधी स्टेडियम रोड, माधोटांडा रोड, नौगंवा चौराहा, शुगर फैक्ट्री, छतरी चौराहा, सुनगढ़ी तिराहा, चौक बाजार समेत कई इलाकों में भटकते देखे गए। निजी अस्पतालों में हड़ताल होने के कारण लोगों को मजबूरी में जिला अस्पताल पहुंचना पड़ा तो कई मरीज तो बिना इलाज कराए ही लौट गए। उधर, गजरौला क्षेत्र की रहने वाली एक महिला के अचानक पेट में दर्द उठने पर उसके परिवार वाले माधोटांडा रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां हड़ताल होने की वजह से अस्पताल कर्मचारियों ने उसे टरका दिया। ऐसे में उसे मजबूरी में इलाज के लिए उसे जिला अस्पताल भागना पड़ा।
नीमा बना मरीजों का सहारा
आईएमए की हड़ताल के बीच नीमा से जुड़े डॉक्टरों ने पूरे दिन ओपीडी सेवा चालू रखकर मरीजों को सहारा दिया। इतना ही नहीं आईएमए के विरोध को गलत भी बताया। नीमा के डॉक्टर मरीजों का निशुल्क इलाज करते रहे। जनपद में करीब नीमा से जुड़े 79 डॉक्टर हैं, जिन्होंने दिन भर ओपीडी सेवा चालू रख मरीजों का इलाज किया। कई मरीज नीमा के डॉक्टरों के पास इलाज कराने पहली बार भी पहुंचे थे।
आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय आह्वान पर ओपीडी बंद करने के निर्देश मिले थे। इसलिए 24 घंटे को जनपद में आईएमए से जुड़े डॉक्टरों ने सेवाएं बंद रखीं। मगर आपातकालीन सेवाओं को चालू रखा गया था, ताकि किसी गंभीर मरीज को किसी तरह की दिक्कत न हो।
- डॉ. तरुन सेठी, अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( आईएमए)
आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति मिलने पर आईएमए का विरोध बिल्कुल गलत है। सर्जरी का जन्मदाता आयुर्वेद ही है। एमएस में सर्जरी को पढ़ाया जाता है, इसलिए आयुर्वेदिक डॉक्टर सर्जरी कर सकते हैं। आईएमए की बंदी होने के कारण मरीजों को दिक्कत न हो इसलिए नीमा ने उनका मुफ्त इलाज किया है।
- डॉ. अश्वनी सचदेवा, अध्यक्ष, नेशनल इंटीग्रेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा)
क्या कहते हैं मरीज
सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए डॉक्टर को दिखाने आई थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। जिला अस्पताल में सरकारी डॉक्टर को दिखाया। वरना काफी परेशानी बढ़ सकती थी।
-गायत्री देवी, पूरनपुर
गांधी स्टेडियम रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अचानक पैर में दिक्कत होने पर वह डॉक्टर को दिखाने के लिए पहुंची थीं। मगर डॉक्टर नहीं मिले। इसलिए वापस लौटना पड़ा।
- कांती देवी, रोहतनिया, बीसलपुर