गेहूं के अवैध भंडारण एवं व्यापार पर अंकुश लगाने को डीएम ने तहसील स्तर पर चार सदस्यीय टीमें गठित की हैं। एसडीएम की अध्यक्षता वाली टीमों में मंडी और व्यापार कर विभाग को भी शामिल किया गया है।
जिले में गेहूं की अच्छी पैदावार को देखते हुए इस बार जिले के साथ ही पड़ोसी प्रांत उत्तराखंड के व्यापारी ऊंचे दाम पर गेहूं खरीद रहे हैं। इस गेहूं का बीज के रूप में प्रयोग कर मोटा मुनाफा कमाने की तैयारियां हैं। इस बावत प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन प्रशासन किसान को अच्छे दाम मिलने की दुहाई देकर अब तक कार्रवाई से बच रहा था। इसके बाद शासन से हुई शिकायत पर खाद्य आयुक्त ने अवैध भंडारण की जांच के निर्देश दिए हैं। खाद्य आयुक्त के निर्देश पर डीएम ने तीनों तहसीलों में एसडीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीमें गठित की हैं। टीम में एसडीएम के अलावा व्यापार कर अधिकारी, मंडी सचिव व वरिष्ठ विपणन निरीक्षक को सदस्य बनाया गया है। अपने आदेश में डीएम ने कहा है कि टीमें गेहूं के अवैध भंडारण के साथ इसके अनाधिकृत व्यापार एवं जिले से सटी उत्तराखंड की सीमा व सीड प्लांटों पर भी अवैध भंडारण की जांच करेगी। तहसील स्तर पर बनी इन टीमों की निगरानी के लिए एडीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है, जिसमें डिप्टी आरएमओ को संयोजक एवं सहायक व्यापार कर आयुक्त को सदस्य बनाया गया है।
एडीएम ने दिए गेहूं की खरीद बढ़ाने के निर्देश
पीलीभीत। एडीएम ने मंडी पहुंचकर खरीद व्यवस्था का निरीक्षण किया और किसानों व व्यापारियों से बातचीत कर खरीद की स्थिति जानी। एडीएम ने किसानों से सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने की अपील की साथ ही संबंधित अधिकारियों को किसानों से संपर्क कर खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए। मार्केट रेट सरकारी रेट से अच्छा होने के कारण सरकारी गेहूं खरीद नहीं बढ़ रही है। इसके लिए अब प्रशासन सीधे किसानों से संपर्क करने में जुट गया है।
एडीएम अजयकांत सैनी शनिवार को सुबह करीब 11 बजे मंडी पहुंचे। यहां उन्होंने विभिन्न एजेंसियों के क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया और अब तक हुई खरीद की समीक्षा की। इसके बाद मंडी समिति के कक्ष में व्यापारियों व किसानों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि बाजार भाव सरकारी रेट से कम हो गया है इसलिए किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचें। इसके साथ ही उन्होंने खरीद से जुड़े अधिकारी कर्मचारियों से भी किसानों से संपर्क कर खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा मंडी पहुंचने वाले गेहूं का निरीक्षण कर केंद प्रभारी किसानों से मिले और सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने को प्रेरित करें। एडीएम ने मंडी सचिव मनीष सिंह ने भी अब तक हुई खरीद की जानकारी ली जिसपर उन्होंने बताया कि इस सीजन में आढ़तों एवं क्रय केंद्रों पर मिलाकर लगभग दो लाख क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है।
रेट गिरने से सरकारी खरीद बढ़ने की उम्मीद
गेहूं की कटाई का काम लगभग समाप्त हो गया है लेकिन किसानों पर अभी भी काफी गेहूं मौजूद है। उधर व्यापारियों द्वारा बीज के नाम पर चल रही खरीद में भी कमी आई है, जिससे खुले बाजार में गेहूं के दाम गिरे हैं। मंडी में 1480 से 1490 रुपये प्रति क्विंटल के दाम मिल रहे हैं, जबकि सरकारी रेट 1525 रुपये है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अब सरकारी खरीद के आंकड़ों में सुधार होगा।
मंडी में हुई 20 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद
बीसलपुर। मंडी परिसर स्थित विभिन्न एजेंसियों के पांचों राजकीय क्रय केंद्रों पर अब तक लगभग 20 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। एसएमआई उपेंद्र गंगवार ने बताया कि सर्वाधिक तौल साढ़े पांच हजार क्विंटल आरएफसी के क्रय केंद्र पर हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन किसानों का गेहूं खरीदा गया है, उनका भुगतान भी कर दिया गया है।