पीलीभीत। कोविड-19 महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के कारण पिछले एक माह से जहां जिले के उद्योग धंधे प्रभावित हुए, वहीं तराई में बीड़ी बनाने का अवैध धंधा जमकर फल फूल रहा है। खास बात यह है कि तेंदु के पत्ते का उत्पादन जिले में कहीं नहीं होता है, मगर लॉकडाउन के बावजूद आसपास के जिलों से तेंदू पत्ता मंगवाने के बाद बीड़ी बनाकर जिले में ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और नेपाल तक इसकी बिक्री की जा रही है। ऐसे में पहले से सरकार को हर माह लाखों रुपये राजस्व का चूना लगाने वालों ने लॉकडाउन में और ज्यादा चांदी काटी, बीड़ी बढ़े हुए दाम पर बेची।
दुनिया में जहां अफीम को काला सोना कहा जाता है, वहीं व्यापार की दुनिया में तेंदू पत्ता हरे सोने का नाम से जाना जाता है। मध्यप्रदेश के अलावा प्रदेश के चित्रकूट, बांदा और महोबा के जंगलों में तेंदू पत्ता खूब होता है। जिससे सरकार राजस्व के रूप मेें मोटी कमाई होती है। तेंदू पत्ते से ही बीड़ी बनाई जाती है। तराई के इस छोटे से जिले में तेंदू पत्ते का उत्पादन तो नहीं होता है, लेकिन बीड़ी निर्माताओं की संख्या 30-35 के आसपास बताई जा रही है।
50 से 60 करोड़ का होता है कारोबार
कारोबारियों के मुताबिक जिले में 50 से 60 करोड़ रुपये सालाना कारोबार होता है। बताते हैं कि बीड़ी कारोबार में भी बड़ा खेल हो रहा है। कुछ कारोबारी माल तो बड़ी मात्रा में तैयार कर बेचते हैं, लेकिन उसका वास्तविक लेखाजोखा न देकर नाममात्र का बीड़ी उत्पादन दिखाकर 12 से 15 करोड़ रुपये राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। आरोप है कि कुछ बीड़ी बनाने वाले निर्माताओं के पास तो कच्चा माल, पक्का माल का स्टाक रजिस्टर, बिल, इनवाइस आदि तक नहीं है और न ही जीएसटी आदि देतीे हैं। मात्र चंद कंपनियां ही जीएसटी देती है।
जिले से गुप्त रास्तों से नेपाल तक भेजी जा रही बीड़ी
बीड़ी तंबाकू पर 28 प्रतिशत और तेंदू पत्ते पर 18 फीसदी जीएसटी है। बीड़ी निर्माता अमरोहा, रामपुर आदि से अवैध तरीके से तंबाकू और तेंदू पत्ता मंगवाते हैं। वहीं कुछ बीड़ी निर्माता तेंदू पत्ते की भी बिक्री करते हैं। अधिकांश बीड़ी निर्माता शारदा की तलहटी में बसी कॉलानियों में महिलाओं को 1000 बीड़ुी बनाने के लिए महज 120 रुपये देकर इस बीड़ी को जिले के अलावा, पड़ोसी राज्य उत्तराखंड और गुप्त रास्तों से नेपाल तक भेजकर बिक्री कर रहे हैं।
लॉकडाउन का भी जमकर उठाया फायदा
कोरोना संक्रमण के चलते 24 मई से पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है। कच्चा माल मुहैय्या न हो पाने के कारण कई उद्योग धंधे प्रभावित हुए, मगर बीड़ी का कारोबार चलता रहा। सूत्रों के मुताबिक गभिया सहराई, महाराजपुर, पुरनपुर और न्यूरिया क्षेत्र में लॉकडाउन में माल की किल्लत होना बताकर कुछ बीड़ी निर्माता बीड़ी के पैकटों को ऊंचे दामों मेें बेचते आ रहे हैं। खास बात यह है कि यह बीड़ी निर्माताओं ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन तो कराया है, लेकिन वास्तविक उत्पादन को छिपाकर मात्र कुछ तैयार करना दर्शाकर हर साल करोड़ों की चपत लगा रहे हैं। फिलहाल अब यह मामला चर्चाओं में आ गया है। यदि जिम्मेदार इस पर अंकुश लगाए तो सरकार को एक बड़ी आमदनी हो सकती है।
40 लाख रुपए वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों को जीएसटी का पंजीकरण कराना अनिवार्य है। जिनका टर्नओवर इससे कम है, वह भी पंजीयन करा सकते हैं। जीएसटी न देकर व्यवसाय करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। - हरेंद्र कुमार, उपायुक्त, वाणिज्य कर
कोविड-19 महामारी लॉकडाउन के दौरान जारी गाइडलाइंस में जिन उद्योगों को खोलने की अनुमति दी गई, उन सभी को खोलने के लिए कह दिया गया है। बीड़ी को लेकर हो रहे कारोबार के संबंध में अनुमति नहीं है। - देवेंद्र प्रताप मिश्र, एडीएम न्यायिक
बीड़ी सिगरेट से कहीं ज्यादा खतरनाक होती है। मजदूर काम करते हैं, तेंदू पत्ते लपेटते वक्त रसायन निकलता है, जिससे हथेली की त्वचा मुलायम हो जाती है, 45 वर्ष की आयु तक पहुंचते हुए कोई गर्म या भारी चीज उठाने लायक नहीं रहती है। - डॉ. सीबी चौरसिया, रिटायर्ड फिजिशियन