पीलीभीत। डीआईओएस कार्यालय के चर्चित घोटाले के मुख्य आरोपी चपरासी इल्हाम शम्सी ने विभाग के एक करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए। सामने आए 35 संदिग्ध खातों में आरोपी ने किसी में आठ तो किसी खाते में 20 लाख रुपये तक भेजे। हालांकि टीमें विस्तृत जांच कर खाताधारकों तक पहुंचने के प्रयासों में जुटी है। वहीं, घोटाले में कई डीआईओएस से लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी और कोषागार के जिम्मेदारों की लापरवाही जगजाहिर होने के बाद भी अब तक कार्रवाई न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
फरवरी की शुरुआत में डीआईओएस कार्यालय के एक करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था। बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर पत्र मिलने के बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने जांच कराई। पाया गया कि डीआईओएस कार्यालय में तैनात चपरासी से बाबू बने इल्हाम शम्सी ने अपनी पत्नी अर्शी खातून के खाते में एक करोड़ रुपये की विभागीय धनराशि का अवैध रूप से लेनदेन किया। जांच आगे बढ़ी तो खुलासे भी चौंकाने वाले हुए। संवाद
सात वर्षों में 30 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी की चर्चा
वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक एक नहीं बल्कि 35 खातों में 30 करोड़ से अधिक रुपये रुपये भेजना पाया गया। यह धनराशि डीआईओएस कार्यालय से जुड़ी पाई गई। इस गड़बड़ी को ठिकाने लगने के पीछे विभाग के बाबू से लेकर तैनात रहे अधिकारियों भी भूमिका भी जगजाहिर हुई। डीएम के निर्देश पर खातों को फ्रीज करने के साथ इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी अर्शी खातून के खिलाफ कोतवाली में डीआईओएस राजीव कुमार की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इधर खातों की जांच शुरू हुई तो सामने आया कि इल्हाम ने सभी खातों में लाखों रुपये की बौछार की। इनमें किसी में आठ तो किसी में 20 लाख रुपये तक भेजे गए। कई खाते उसके करीबियों के मिले। इसमें कई महिलाएं भी शामिल हैं। अब पुलिस समेत अन्य जांच टीमें खाताधारक तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हैं, जिससे तह तक पहुंचा जा सके।
प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप के बाद पारदर्शी होगी जांच प्रक्रिया
घोटाले का मामला प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख के संज्ञान में आया। उन्होंने डीएम-एसपी से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पूरे मामले की गंभीरता देखते हुए मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाने की बात भी कही। ऐसे में माना जा रहा है कि पूरे मामले में जांच और पारदर्शी होगी। 2018 से लेकर अबतक तैनात रहे अफसरों पर भी कार्रवाई की आंच आएगी।
संपत्ति खरीदने में भी खपाए रुपये, जांच में खुलेंगी परतें
आरोपी इल्हाम ने विभाग के रुपये ठिकाने लगाने के बाद उन्हें प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के अलावा दूरदराज के राज्यों में भी जमीन खरीदने के धंधे में खपाया। उसने अपने करीबियों के नाम जमीनों को खरीदवाया। माना जा रहा है कि जांच में उसकी इस करतूत की परतें भी खुलकर सामने आएंगी।