पीलीभीत। पुरातत्व विभाग कोतवाली और बरेली गेट के बाद अब बीसलपुर क्षेत्र के इलाबांस देवल मंदिर को भी संरक्षित करेगा। सामाजिक कार्यकर्ता की मांग पर राज्य पुरातत्व विभाग की निदेशक रेनू ने डीएम से मंदिर से जुडे सभी राजस्व अभिलेख मांगे हैं।
जनपद की ऐतिहासिक व पौराणिक धरोहरों के संरक्षण के लिए सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने बीसलपुर तहसील के इलाबांस देवल मंदिर को पुरातत्व विभाग के अधीन करने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने मार्च 2018 को धरोहर के विषय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था।
अप्रैल 2018 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के आगरा सर्किल ने मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया था। निरीक्षण की रिपोर्ट विभाग ने उत्खनन शाखा के निदेशक को सौंपी। जिसमें उत्खनन की सिफारिश की गई, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता ने वर्ष 2022 में संस्कृति मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से पीलीभीत प्रवास के दौरान मुलाकात कर जानकारी दी।
अगस्त 2022 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के लखनऊ सर्किल ने दोबारा स्थलीय निरीक्षण किया। इसमें भी उत्खनन को महत्वपूर्ण माना गया। मामला राज्य सरकार के पाले में डाल दिया गया। इसके बाद शिवम कश्यप ने राज्य पुरातत्व विभाग से जिले की दस धरोहरों बरेली दरवाजा, कोतवाली दरवाजा, इमामबाड़ा, हाफिज रहमत खां की मां का मकबरा, इलाबांस देवल मंदिर, नीलकंठ सरोवर बिलसंडा, राजा मोरध्वज का किला बिलसंडा, चक्रतीर्थ जहानाबाद, अटा परसुआ जहानाबाद आदि को संरक्षित करने की मांग की।
इस पर राज्य सरकार ने इलाबांस देवल के मंदिर को संरक्षित धरोहर की सूची में शामिल कर लिया है। धरोहर को लेकर जिला प्रशासन से खसरा, खतौनी, नक्शा, प्रस्तावित भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेखों को मांगा गया है। निदेशक रेनू की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस धरोहर को संरक्षित किया जाना है। (संवाद)
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इलाबांस देवल से संबंधित खास
-स्थानीय लोग इस स्थल को वन देवी/वन दुर्गा के रूप में पूजते हैं।
-लोध राजपूत समाज के लोग इन्हें अपनी ईष्ट देवी/कुल देवी मानते हैं।
-अनुमानित तौर पर मंदिर का निर्माण 11वीं या 12वीं शताब्दी में हुआ था।
-मंदिर का निर्माण नागरी शैली में किया गया है।
-शिलालेख के अनुसार मंदिर का निर्माण विक्रमी संवत 1049 में किया गया।
-दक्षिण भारत के छिंदा राजवंश से संबंध रखने वाले राजा की पत्नी लक्ष्मी ने अपने पति की पराक्रम गाथा को दर्शाते हुए इस धरोहर का निर्माण कराया।
-भारतीय इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण पुस्तक इपिग्राफिया इंडिका के अंक में इस धरोहर का उल्लेख है।
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प्रमुख शोध कार्य
-1819 में अंग्रेजी विद्वान एचएस वुल्डरसन ने यहां शोध किया।
-1837 में अंग्रेजी विद्वान जेम्स प्रिंसेप ने भी शोध किया।
-1871 में अंग्रेजी विद्वान व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रथम निदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम ने शोध किया।