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बाढ़ नियंत्रण के कार्यो में गुणवत्ता की अनदेखी

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नगरिया खुर्द कला क्षेत्र में कार्य स्थल के निकट से उठाई जा रही रेत। - फोटो : PILIBHIT
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कलीनगर। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित बचाने के लिए मंजूर हुए प्रोजेक्ट के टेंडर 28 से 30 प्रतिशत कम रेट पर लिए गए। अब काम के नाम पर गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। वर्तमान में नगरिया खुर्द कला में जारी परकोपाइन के कार्य को औपचारिकता निभाकर पूरा किया जा रहा है। अफसरों की भूमिका पर भी ग्रामीण सवाल उठाने लगे हैं।
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नगरिया खुर्द कला में जीयो बैग के अलावा बाढ़ नियंत्रण कार्यों को सुरक्षित बचाने के लिए परकोपाइन (नदी की धार रोकने के लिए सीमेंट के बने पोल) लगाने का कार्य किया जा रहा है। कार्य में मानक को ताक पर रखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि परकोपाइन के कार्य में एक सेट में चार सरिया और सात रिंग लगाने के साथ तीन/एक का मसाला लगाया जाता है लेकिन मौके पर दो सरिया और तीन रिंग लगाकर छह/एक मसाला लगाया जा रहा है। सूखने से पहले लगाने की प्रकिया पर जोर दिया जा रहा है। जानकारी के बाद भी अभियंता अनजान बने है।
कार्य स्थल से रेत निकालने से खतरा बढ़ने का आशंका
जीओ बैग लगाने का कार्य भी किया जा रहा है। बैग में रेत भरने के लिए कार्य स्थल के निकट मडपंप से रेत निकाली जा रही है। इससे नदी की गहराई अधिक होने से खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल पिछली बरसात से पहले 9 ए स्पर के निकट मंडपंप से कार्य कराने को रेत निकाली गई थी। गहराई अधिक होने से नदी ने उस स्थान पर अधिक कटान कर महत्वपूूर्ण स्पर को भी काट दिया था।
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