पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज में रैन बसेरा तो है। बेड और गद्दे भी पड़े हैं, लेकिन ओढ़ने के लिए रजाई और कंबल नहीं हैं। ऐसे में अगर आपको मेडिकल कॉलेज में रात काटनी है तो रजाई खुद ही लेकर जाएं। ऐसे में तीमारदारों को ठंड से बचने के लिए मरीजों के साथ ही वार्ड में रात काटनी पड़ती है।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों के साथ तीमारदार भी आते हैं। वार्ड में मरीजों को बेड, कंबल व अन्य जरूरी सामान मिल जाता है, लेकिन तीमारदारों के लिए क्या व्यवस्था की गई है, इसकी हकीकत जानने के लिए बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने रैन बसेरों की पड़ताल की। मेडिकल कॉलेज में पुरुष अस्पताल का रैन बसेरा ऑक्सीजन प्लांट के पास बना है, जो बंद मिला।
वहीं महिला अस्पताल का रैन बसेरा खुला मिला। महिला अस्पताल के रैन बसेरा में महिला, पुरुष के अलग-अलग कमरों में बेड और गद्दे पड़े मिले, लेकिन वहां कोई भी तीमारदार ठहरा नहीं मिला। बसेरा के पास ही धूप सेंकते लोगों से बात की तो लोगों ने बताया कि यहां पर लेटने की व्यवस्था तो है, लेकिन ओढ़ने के लिए कंबल नहीं हैं। महिला शौचालय तो खुला रहता है, लेकिन पुरुष शौचालय बंद रहता है। ऐसे में वह लोग अपने मरीज के पास ही वार्ड में रात गुजार लेते हैं।
हमारा मरीज भर्ती है। रैन बसेरा में रात रुकने के लिए पहुंचा, लेकिन यहां पर ओढ़ने के लिए कुछ भी नहीं मिला। केयरटेकर भी नहीं मिला, जिससे कंबल मांग लेते। - दिलीप, तीमारदार
रैन बसेरा में बेड और गद्दे पड़े हैं, लेकिन न तो चादर है और न ही ओढ़ने के लिए कोई कंबल। कंबल कहां मिलेगा यह भी बताने वाला कोई नहीं मिला। केयरटेर ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। - चमेली देवी, तीमारदार
रैन बसेरा में ठहरने के लिए तीमारदार को वार्ड में बताना होगा। आधार कार्ड देेने के बाद कंबल देकर रैन बसेरा में ठहराया जाता है। पिछले वर्ष कुछ लोग कंबल अपने साथ लेकर चले गए थे तो कुछ लोग अवैध रूप से रहने लगे थे। इस वजह से आधार कार्ड जमा करने के बाद ही रैन बसेरा में ठहरने की व्यवस्था कराई जाती है। -डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
चमेली ।
चमेली ।
चमेली ।
चमेली ।
चमेली ।
चमेली ।