सवारी का इंतजार करते पूर्णागिरी से आए श्रद्धालु। संवाद
पीलीभीत। जिले में परिवहन व्यवस्था का बुरा हाल है। शाम पांच बजे के बाद अधिकांश रूटों पर बसें नहीं मिलती हैं। इसके बाद डग्गामार वाहन चालक पूरी तरह मनमानी पर उतारू हो जाते हैं। शाम को बीसलपुर या बरखेड़ा जाना किसी जंग से कम नहीं हैं। घंटों असम चौराहे पर इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद डग्गामार वाहन चालक की मनुहार करनी पड़ती है। अगर वे मान गए तो किराया दोगुना लेते हैं। ऐसे में कई राहगीर तो रात में असम चौराहे किनारे फुटपाथ पर ही सो जाते हैं।
बीसलपुर और पूरनपुर से हजारों की संख्या में दैनिक यात्री सफर करते हैं। दिन में जैसे-तैसे लोग अपने ठिकाने तक पहुंच जाते हैं लेकिन शाम होते ही आवागमन के साधन का संकट गहराने लगता है। लोगों की समस्या से रोडवेज को कोई भी सरोकार नहीं। आस पास के गांव के अलावा पूर्णागिरि से सैकड़ो यात्री सवारी वाहन के इंतजार में घंटों असम चौराहे पर भटकते रहते हैं। बाद में वहां खड़े डग्गामार चालकों को मनाया जाता है। इसके बाद डग्गामार वाहन दोगुना किराया वसूलते हैं। कुछेक चालक तो मनमाने रुपये न मिलने पर सवारियों से बदसलूकी कर उन्हें उतार भी देते हैं। एआरएम विजय कुमार ने बताया है कि शाम को बीसलपुर मार्ग पर सवारियां ही नहीं हैं। इसलिए बस का संचालन नहीं करते हैं।
न टाइम कीपर और न समय सारणी
अमूमन नौगवां से बसें जाती हैं। नौगवां प्रमुख चौराहा होने के बावजूद भी यहां पर न तो समय सारणी को लगाया गया और न ही किसी कर्मचारी को नियुक्त किया गया है। इससे सवारियों को कोई सटीक जानकारी ही नहीं मिल पाती है। सवारियां इधर उधर भटकती हुई वाहन की तलाश में असम चौराहा पहुंच जाती है। लेकिन वहां भी कुछ नहीं मिलता।
वर्जन
बीसलपुर रूट पर दिन में बसें चलती है। रात में पर्याप्त सवारियां न मिल पाने के कारण बसें नहीं चलाई जा सकती। - विजय कुमार, एआरएम
सवारी का इंतजार करते पूर्णागिरी से आए श्रद्धालु। संवाद
सवारी का इंतजार करते पूर्णागिरी से आए श्रद्धालु। संवाद