स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव गांव स्वच्छता अभियान चलाने को विकास विभाग लाखों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन खुद विकास भवन की स्थिति उसके उलट है। यहां काफी गंदगी है। सबसे ज्यादा बुरा हाल यहां के शौचालयों का है। बदबू के कारण इनका प्रयोग तो दूर इनमें घुसना भी मुश्किल है। बेहतर होगा कि अगर आपको यहां आना ही है तो अपना नाक-मुंह ढककर आएं।
शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन और विकास भवन ओडीएफ और स्वच्छता अभियान के तहत कार्यक्रम चला रहा है। पिछले दिनों इसका हजारों रुपये खर्च का शहर में अभियान का ढिंढौरा भी पीटा गया था, लेकिन जिले में स्वच्छता अभियान के नाम पर लाखों रुपये का बजट ठिकाने लगाने वालों की हकीकत विकास भवन स्वयं बयां कर रहा है। विकास भवन के प्रथम तल पर जाने के लिए चार सीढ़ियां हैं। इनमें आगे की ओर बनी दोनों सीढ़ियों पर रखे पीकदान यहां की हालत स्वयं बयां कर रहे हैं। इससे आगे जाइए तो जगह जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। सबसे खराब स्थिति शौचालय एवं भवन में पीछे की ओर बनी सीढ़ियों की हैं। विकास भवन के सभी शौचालय काफी गंदे हैं और इनमें पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। सफाई न होने के कारण इनमें दुर्गंध आ रही है। भूमितल पर डीडीओ कार्यालय की गली में घुसते ही दुर्गंध आती है, जिसके चलते लोगों को नाक पर हाथ लगाकर निकलना पड़ता हैैं। वहीं प्रथम व द्वितीय तल पर बने शौचालय भी काफी जर्जर और गंदे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि जिम्मेदार अफसरों के कक्षों में शौचालय अटैच हैं, इसलिए वह इस ओर ध्यान नहीं देते। सूत्रों की मानें तो सफाई के लिए कर्मचारी ड्यूटी के समय अफसरों के घरों की सफाई में व्यस्त रहता है जिससे विकास भवन उपेक्षित रह जाता है। इस बावत सीडीओ से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल नहीं मिल सका।