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Pilibhit News: यूडीआईडी के बिना कैसे स्मार्ट बनेंगे दिव्यांग, 146 का सत्यापन पेंडिंग

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पीलीभीत। पेंशन पाने वाले दिव्यांजनों को यूडीआईडी कार्ड दिए जाने की व्यवस्था है। इस कार्ड के माध्यम से दिव्यांगजनों को यात्रा सहित कई सुविधाएं मिलती हैं। जनपद के करीब 146 आवेदनों का सत्यापन पेंडिंग है, जिसकी वजह से उनको यूडीआईडी का लाभ नहीं मिल पा रहा।स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जनपद में 17 हजार से अधिक को यूडीआईडी कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
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40 फीसदी से अधिक दिव्यांगता वाले दिव्यांजनों का प्रमाण-पत्र होने के साथ ही प्रत्येक माह एक हजार रुपये की पेंशन शुरू हो जाती है। इसके तहत तीन महीने में तीन हजार रुपये एक साथ उनके बैंक खातों में भेजे जाते हैं। जनपद में वैसे तो दिव्यांगजनों की संख्या बहुत है, लेकिन पात्रता सूची में 18 हजार के आसपास हैं।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जनपद के 17,642 दिव्यांगों को यूडीआईडी जारी किए जा चुके हैं। सत्यापन न हो पाने के कारण करीब 146 आवेदन रुके चल रहे हैं। दिव्यांगजनों को यूडीआईडी से बहुत सारे लाभ हैं। इसमें यात्रा पूरी तरह नि:शुल्क है। साथ ही चार फीसदी अतिरिक्त आरक्षण दिया जाता है। इसके अलावा गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप आदि कारोबार के लिए सब्सिडी आदि दिए जाने की व्यवस्था है। दिव्यांग प्रमाण-पत्र से लेकर यूडीआईडी जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। जिला बोर्ड के परीक्षण के बाद पत्र दिव्यांगों का डाटा सीएमओ को भेज दिया जाता है। इसके बाद सीएमओ स्तर से डाटा शासन को भेज दिया जाता। इसके बाद शासनस्तर से ऑनलाइन यूडीआईडी कार्ड जारी होते हैं।
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30 दिन में बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत होना अनिवार्य
दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए किसी भी जनसेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसमें आधार कार्ड, बैंक, फोटो आदि दस्तावेज लगते हैं। आवेदन के एक महीने के अंदर दिव्यांगजन को जिला बोर्ड कमेटी के समक्ष प्रस्तुत होना होता है। बोर्ड के डॉक्टर दिव्यांगता की जांच करते हैं, जो पात्र होते हैं उनको प्रमाण-पत्र जारी होते हैं। एक महीने बाद ऑनलाइन आवेदन निरस्त हो जाता है। मौजूदा समय में जनपद के 3971 मरीजों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, जिनका दिव्यांगता परीक्षण किया जाना है।

हर सोमवार को जिला पुनर्वास केंद्र पर लगता है कैंप
टनकपुर हाईवे पर स्थित कांशीराम बरातघर के पीछे जिला पुनर्वास केंद्र पर प्रत्येक सोमवार को दिव्यांगों के लिए विशेष कैंप लगता है। सीएमओ द्वारा नामित डॉक्टरों का पैनल यहां बैठता है, जो दिव्यांगों का दिव्यांगता परीक्षण करता है। अगर किसी की 40 फीसदी या इससे अधिक दिव्यांगता है तो उसका प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।

पात्र दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड जारी किए जाते हैं। जनपद में अब तक 17,642 से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। मात्र 146 का सत्यापन होना है, जो जल्द कराकर उनको भी कार्ड जारी कर दिए जाएंगे। -डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ
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