अमरिया क्षेत्र के हिमकनपुर व बेहरी गांव के बीच घूम रहे खूनी बाघ को पकड़ने में वनविभाग और विशेषज्ञों की टीमें नाकाम साबित हो रही है। लगभग 22 दिन से चल रहा अभियान बेनतीजा रहा है। बाघ न पकड़े जाने से सबसे बड़ी दिक्कत किसानों को आ रही है। समय से खाद पानी एवं निराई न हो पाने से उनकी फसलें चौपट होने के कगार पर हैं।
तीन लोगों की जान लेने के बाद भी खुले में घूम रहे बाघ को पकड़ने के लिए वनमंत्री ने लेकर वनाधिकारियों तक बड़े बड़े दावे कर चुके हैं। चार हाथियों के साथ लखनऊ दिल्ली की टीमों के साथ स्थानीय अधिकारी लगे हैं लेकिन बाघ है कि पकड़ में नहीं आ रहा है। हां इतना जरूर है कि वन विभाग उसे एक निर्धारित क्षेत्र में रोकने में कामयाब हुआ है लेकिन न तो वन विभाग की समस्या खत्म हो रही है और न ही किसानों की। अभियान में लगे वनकर्मियों से लेकर विशेषज्ञों तक सभी को वेतन के खाना पीना तो मिल ही ही है लेकिन किसानों के आजीविका प्रभावित हो रही है। फसलों की देखभाल न होने सेे वह खराब हो रही हैं वहीं पालतू पशुओं के लिए भी चारा मिलने में दिक्कत आ रही है। वहीं वह अपने पशुओं को खेतों में खुला छोड़ने से भी डर रहे हैं। 22 दिन से किसानों की खेती भगवान भरोसे पड़ी हुई है। बेहरी के मुकेश सिंह ने बताया कि बाघ की दहशत के चलते घर से निकलने और विशेषकर नदी पार के खेतों पर जाने ने घबरा रहे हैं। इससे खेती प्रभावित हो रही है। आखिर कब किसान अपनी खेती को यूं ही छोड़कर बैठे रहेंगे। फसल चौपट होने के बाद उसकी भरपाई कौन करेगा।