प्रयासों के बाद भी किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं ला रहे हैं। इससे सरकारी खरीद की गति काफी धीमी है। यदि अगले 10 दिनों में सरकारी खरीद नहीं हुई तो लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। शासन ने इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 1625 रुपये घोषित किया है। साथ ही 10 रुपया भाड़े का दिया जा रहा है। कुल मिलाकर किसान को 1635 रुपये प्रति क्विंटल की दर मिल रही है, लेकिन इसे पाने के लिए किसानों को काफी दिक्कत होती है। क्रय केंद्र पर गेहूं को साफ कराए। नमी की जांच कराए। इसके बाद तौल होने पर चेक या आरटीजीएस से भुगतान मिलेगा, जिसमें एक-दो दिन लग सकते हैं। वहीं खुले बाजार में करीब 1600 रुपये में गेहूं बिक रहा है। इससे किसानों को बिना किसी झंझट के पूरे राम मिल रहे हैं। किसान अपना गेहूं सरकारी क्रय केंद्रों पर ले जाने के बजाय आढ़तों पर बेच रहे हैं। किसानों के सरकारी क्रय केंद्रों की ओर आकर्षित न होने के चलते सरकारी खरीद आगे नहीं बढ़ पा रही है। अब तक मात्र 62 सौ मीट्रिक गेहूं की सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदा गया है।
कई क्रय केंद्र अभी भी चालू नहीं
गेहूं खरीद को जिले में 89 क्रय केंद्र खोले गए हैं। लक्ष्य अधिक होने के चलते इनकी संख्या बढ़ाकर 108 करने की तैयारी भी चल रही है। लेकिन 89 क्रय केंद्रों में करीब एक दर्जन ऐसे हैं जो अभी अभिलेखों में ही चल रहे हैं। किसी के खाते में पैसा नहीं है तो किसी का बैंक खाता ही नहीं खुला है। इनमें दो क्रय केंद्रों को बंद करने की तैयारी भी चल रही है।
मंडी में कम हो रही आवक
मंडी समिति में भी पिछले कुछ दिनों से गेहूं की आवक घट रही है। शुक्रवार को मात्र 11 हजार क्विंटल गेहूं की आवक मंडी में दर्ज की गई।