डीएम मासूम अली सरवर ने कहा कि ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी आशाओं पर निर्भर है। आशाएं अपने कार्यों को बेहतर तरीके से अंजाम दें, ताकि स्वस्थ्य देश का निर्माण किया जा सके।
वह रविवार को शहर के एक बैंक्वेट हॉल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तत्वावधान में हुए आशा सम्मेलन में आशाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आशा कार्यक्रम पिछले दस वर्षों से अनवरत जारी है। आशा की बेहतर कार्यशैली के चलते ही मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। उन्होंने आशाओं से अपने कार्यों को ईमानदारी से अंजाम देने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने आशाओं की समस्याएं भी सुनी और उनका जल्द ही निस्तारण कराने का आश्ववासन दिया। सीएमओ डॉ. श्रीओम चौहान ने परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी शिविर आयोजित करने की बात कही। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सर्वेश वर्मा ने एनएचएम की योजनाओं से अवगत कराया गया। एनएचएम के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ. अजय कुमार वर्मा ने आशाओं की भूमिका की विस्तार से जानकारी दी। डीसीपीएम उत्तम कुमार ने आशाओं के कार्यों के मूल्यांकन की जानकारी दी। इससे पूर्व आशाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
सम्मेलन में वर्ष 2014-15 में आशाओं द्वारा किए गए कार्यों के मूल्यांकन के आधार पर प्रत्येक विकास की तीन-तीन आशाओं को पुरस्कृत किया गया। डीएम ने आशाओं को प्रमाणपत्र देकर उनके कार्यों की सराहना की। संचालन सहायक शोध अधिकारी हबीबुल हसन ने किया। सम्मेलन में करीब 796 आशाओं ने भाग लिया। इस मौके पर चिकित्साधिकारी डॉ. टीएन राय, डॉ. आरके सिंह, डॉ. मोहम्मद असलम, डॉ. ठाकुरदास, डॉ. एएच अंसारी, अजय शुक्ला, गोकरन सिंह, शकुंतलापाल, प्राची अग्रवाल, आनंद कुमार, अनुराग, सुशीलपाल, विनोद कुमार शाक्य आदि मौजूद रहे।