तराई का जिला पीलीभीत पूरे प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के लिए एक अलग पहचान रखता है। यहां एक गांव ऐसा भी है, जहां ईश्वर की पूजा और अल्लाह की इबादत एक साथ एक ही स्थान पर होती है। सांप्रदायिकता को लेकर हल्ला करने वालों के लिए पिपरा गांव का यह स्थल एक नई सीख देता है।
हम बात कर रहे है शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर शाहजहांपुर रेलवे लाइन के किनारे बसे पिपरा वाले, पिपरा भगू, गौटिया और गुटैया चार गांवों के बीच खलिहान में बने धार्मिक स्थल की। एक ही चबूतरे पर ब्रहमदेव बाबा का स्थान और हजरत सैय्यद बाबा की दरगाह शरीफ है, जिसमें गांव के लोग पूजा पाठ किया करते हैं। एक ओर इस मजार पर लोग दुआ मांगते हैं तो बराबर में ब्रहमदेव बाबा की पूजा करते हैं। आस्था की अनूठी तस्वीर जिले के भाईचारे को और मजबूत बनाने के लिए काफी है।
हर वर्ष होते हैं अखंड पाठ और उर्स
हर साल दोनों समुदायों से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम यहां पर आयोजित किए जाते हैं। हिंदू पक्ष की ओर से मई में अखंड पाठ, तो मुस्लिम पक्ष का भव्य उर्स का आयोजन होता है, जिसमें दोनों धर्मों के लोग मिलजुल कर सहभागिता करते हैं। दरगाह हजरत सैय्यद थान वाले बाबा के नाम पर बनीं मजार शरीफ पर मन्नतें पूरी होनें पर चादरपोशी की जाती है। विशाल भंडारा ग्रामीण करते है, जिसमें आसपास के क्षेत्र के लोग भी पहुंचते है।
आयोजन में नहीं होता कोई भेदभाव
गांव की रहने वाली चंद्रावती बताती है कि इस स्थान की कोई भी समिति नही है। जो भी आयोजन होते हैं, मिलकर सार्वजनिक तरीके से करवाए जाते हैं। किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जाता है।