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समाजसेवियों की कमी नहीं, फिर भी 40 परिवारों के सामने भुखमरी का संकट

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पीलीभीत। लॉकडाउन होने के बाद जरूरतमंदों को खाने के पैकेट उपलब्ध कराने के लिए समाजसेवी संगठन, जनप्रतिनिधियों की बाढ़ सी आ गई थी। लोग राशन और खाने के पैकेट लेकर बांटने निकल पड़े। कोई 20 हजार पैकेट रोज बांटने का दावा कर रहा है तो कोई हजारों पैकेट राशन सामग्री के। सात कम्यूनिटी किचन भी चल रहे हैं। इन सबके दावे अलग हैं और सच्चाई कुछ और। शहर के ही एक कोने में 40 मजदूरों के परिवार ऐसे हैं, जहां न तो भोजन के पैकेट पहुंच रहे हैं, न ही राशन सामग्री। परिवार के सदस्यों ने अफसरों से भी शिकायत की है। मगर, अब भी उन्हें खाना नहीं मिला है।
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कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद पूरे देश में लॉकडाउन है। ऐसे में रोजाना कमाकर परिवार चलाने वाले मजदूर, रिक्शा चालक, ऑटो चालक बेरोजगार हो चुके हैं। इनके परिवारों के सामने भुखमरी का संकट पैदा हो गया है। शहर के मोहल्ला खुशीमल और खैरूल्लाशाह में रहने वाले लगभग 40 परिवार सामान्य दिनों में रोजाना मेहनत मजदूरी कर भरण पोषण करते थे। लॉकडाउन के बाद इनके सामने दो वक्त की रोटी का संकट पैदा हो गया है। इन परिवारों में ज्यादातर लोग ठेला, रिक्शा चलाते हैं या फिर शादी बरातों में कारीगार और वेटर का काम करते हैं। उन्हें लॉकडाउन के बाद से दो वक्त का खाना मिलना मुश्किल हो रहा है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि अभी उनके पास कोई भी समाजसेवी खाना या राशन देने नहीं आया। सरकार की मंशा है कि लॉकडाउन में कोई भी भूखा न सोए। इनके पास राशन कार्ड नहीं है। इसलिए कोटेदार ने भी राशन नहीं दिया। इन परिवारों ने अपने नाम और पतों की सूची प्रशासनिक अफसरों से लेकर राजनीतिक दलों के दफ्तरों में भी भिजवाई। मगर, कहीं से राहत नहीं मिली।
अमर उजाला टीम ने इन मोहल्लों में जाकर जब पता लगाया तो बात वाकई सच निकली। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि वह प्रशासनिक अफसर को तहसील में नाम पतों की सूची देने गए तो उसे वहां से भाग दिया गया। जरूरतमंदो के मुताबिक लॉकडाउन में काम धंधा हाथ उनके हाथ से छिन गया। कहने को तो सात सरकारी कम्यूनिटी और 10 प्राइवेट रसोई चल रही हैं। मगर, इसके बाद भी गरीब परिवारों का यह कहना कि वे कोरोना से बाद में मरेंगे, जल्द ही काम नहीं मिला तो भुखमरी से पहले मर जाएंगे।
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यूं जाहिर की अपनी पीड़ा
मेहनत मजदूरी कर परिवार का खर्च चलते थे। लॉकडाउन ने हाथ काम धंधा छीन लिया। परिवार का पालन पोषण कैसे किया जाए। प्रशासन खाना तो बांटा रहा है, लेेकिन हम जैसे लोगों को नहीं मिल रहा है। -दीपक कुमार, मोहल्ला खुशीमल
पति रंगील चौराहा पर चाय का ठेला लगते थे, लॉकडाउन होने से काम बंद हो गया है। परिवार पर संकट आ गया है। कभी खाना बन गया तो ठीक। वरना, भूखा ही सोना पड़ता है। - सुनीता देवी, मोहल्ला खुशीमल
मेरा परिवार संकट से जूझ रहा है। कोई भी समाजसेवी और अधिकारी मोहल्ले में खाना बांटने नहीं आया है। अगर, हालात नहीं सुधरे तो ऐसे ही मौत हो जाएगी। - राधा, मोहल्ला खैरूल्लाशाह
शादी बरात निरस्त होने से पति का काम ठप हो गया है। ऐसे में परिवार परेशानी के दौर से गुजर रहा है। प्रशासन की ओर से कोई खाना भिजवाना तो दूर की बात है कोई देखने भी नहीं आता है। - बबली, मोहल्ला खैरूल्लाशाह
पति शादी बरातों में खाना बनाते हैं। इन दिनों शादियां बंद हैं। आमदनी भी बंद हो गई। परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट है। हमें कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है। - राजबेटी, मोहल्ला खैरूल्लाशाह
जहां से भी जानकारी मिल रही है, वहां खाना पहुंचाया जा रहा है। शहर के इस इलाके में ऐसे परिवारों के बारे में जानकारी नहीं है। अगर इन परिवारों को खाना नहीं मिल रहा है तो पहुंचाया जाएगा। - अविनाश चंद्र मौर्य, एसडीएम सदर
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