निजाम क्या बदला, आवास विकास कालोनी के समीप बसी कांशीराम कालोनी के लोग बेसहारा हो गए। तत्कालीन बसपा सरकार ने वर्ष 2009 में 240 परिवारों को इस कालोनी में बसाया था। सरकार रहने तक तो कालोनी में सुविधाओं का जखीरा लगा रहा, लेकिन सरकार बदलते ही सुविधाएं हटा ली गईं। अब करीब 1600 आबादी वाली इस कालोनी को तीज त्योहार भी गंदगी के बीच ही मनाने पड़ते हैं। होली नजदीक है, ऐसे में यदि पालिका प्रशासन द्वारा साफ सफाई नहीं कराई गई तो इन सभी को इस बार भी इसी बदहाली के बीच त्योहार मनाना पड़ेगा।
गंदगी से पटी नालियां सीवर टैंक हुए फुल
गंदगी से पटी सड़कें और बजबजाती नालियों ने कालोनीवासियों का जीना दुश्वार कर रखा है। सड़कों के किनारे, हैंडपंप के समीप कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। साफ सफाई न होने से नालियां भी पूरी तरह से चोक हो चुकी हैं। मजबूरन लोगों को खुद ही साफ सफाई करनी पड़ रही है। वहीं कालोनी के अधिकतर सीवर टैंक भी फुल हो चुके हैं। सीवर टैंकों के आसपास बने क्वार्टरों में रहने वालों का बुरा हाल है।
बूंद-बूंद पानी को तरसते हैं लोग
कालोनी में शुद्घ पेयजल की समस्या भी हमेशा मुंह उठाए रहती है। नौ हैंडपंपों में मात्र चार हैंडपंप चालू हालत हैं। पूर्व में इसकी पेयजल सप्लाई ओवरहेड टैंक से जोड़ दी गई लेकिन दूसरी और तीसरी मंजिल पर पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच रही है।