डीएम मासूम अली सरवर ने कहा कि उर्दू मीठी और दिलों को जोड़ने वाली भाषा है। उर्दू में जो भी लिखा या पढ़ा जाता उसका असर दिल की गहराइयों तक होता है। वह डॉ. अल्लामा इकबाल के जन्मदिन पर आयोजित यौमे उर्दू कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे।
शहर के एक बारात घर में उर्दू फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित यौमे उर्दू कार्यक्रम का शुभारंभ हाफिज जमील ने आयते करीमा की तिलावत से किया। इस मौके पर डीएम ने पिछले दनों उर्दू भाषा को लेकर दो प्रतियोगिता के विजेताओं सोनम अंसारी, तैयबा खान, हुमा, फराजिया अकील, आफरीन अंसारी और नशरा अंसारी को पुरस्कृत किया। डॉ. अल्लामा इकबाल के जन्मदिवस पर बतौर मुख्य अतिथि डीएम ने कहा कि डॉ अल्लामा ने उर्दू की जिस तरह खिदमत की है उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने नई नस्लों को उर्दू के फायदों से अवगत कराया। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य फिरासत हुसैन ने भी डॉ. इकबाल की सेवाओं को सराहा। उनकी भाषा से प्रेम की भावना को आत्मसात करने के लिए नौजवानों का आह्वान किया। फाउंडेशन के अध्यक्ष फुरकान हाशमी, सचिव शरीफ अंसारी, मकबूल हुसैन फैज, इमान नकवी, लईक खां, रुकैया नजम, संजीदा नूर ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन इरफान सागर ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री हुसैन को उम्र ए रवां अदबी खिदमात अवार्ड से नवाजा गया। कनवीनर मोहम्मद अली नवेद ने आभार व्यक्त किया।