पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के ईको सेंसिटिव जोन में नियमों के विपरीत बने रिजॉर्ट और अन्य व्यावसायिक ढांचे के मामले में एनजीटी ने सुनवाई तेज कर दी है। याचिकाकर्ता ने पीटीआर की एक किलोमीटर प्रतिबंधित सीमा के भीतर 32 अवैध रिजॉर्ट और अन्य स्थायी निर्माण मिलने की बात कही है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
लखनऊ निवासी एक अधिवक्ता ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर पीटीआर के आसपास ईको सेंसिटिव जोन में बिना अनुमति और उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत बने रिजॉर्ट और होटलों को हटाने की मांग की थी। इस दायरे में नियमविरुद्ध तरीके से 32 रिजॉर्ट बने होने का दावा किया गया।
याचिका में कहा गया था कि संरक्षित वन क्षेत्र की एक किलोमीटर सीमा के भीतर व्यावसायिक निर्माण से वन्यजीवों का प्राकृतिक कॉरिडोर प्रभावित हो रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ के समक्ष राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), प्रधान मुख्य वन संरक्षक के प्रतिनिधि और जिलाधिकारी पीलीभीत की संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद पीठ ने याचिकाकर्ता को सभी 32 रिजॉर्ट संचालकों और प्रोजेक्ट प्रपोनेंट्स को पक्षकार बनाने तथा उन्हें नोटिस तामील कराने की अनुमति दे दी।
कुछ प्रत्यर्थियों की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे स्वीकार करते हुए एनजीटी ने अगली सुनवाई 29 सितंबर निर्धारित की है। संवाद