जिले में डेंगू को लेकर स्थिति बिगड़ी हुई है। एलाइजा जांच में 187 और एनएस वन जांच में 11 सौ से अधिक मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। विभाग पूरी तरह से डेंगू की रोकथाम के प्रयासों में जुटा है। इसके लिए जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी स्तर पर बैड की संख्या बढ़ा दी गई। कई टीमों को निगरानी के लिए लगाया गया है। अब लैप्टोस्पाइरोसिस बीमारी के केस मिलने के बाद विभाग की चुनौती और बढ़ गई है। अफसरों के मुताबिक लैपटोस्पाइरोसिस प्राथमिक रूप से जानवरों का रोग है जो कभी कभार मनुष्य में भी पहुंच जाता है। यह रोग लैप्टोस्पाइरा वंश के जीवाणु की दो प्रजातियों लैप्टोस्पाइरा इंट्रेरोगान और लैप्टोस्पाइरा वाइफैलैक्सा के कारण होता है। इस रोग में डायरिया और पीलिया का खतरा बढ़ जाता है।
शरीर से ब्लीडिंग भी होने लगती है। तीन दिन पूर्व जिले में ऐसे 19 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम सतर्क हो गई है। मरीजों को ट्रेस करने के साथ निगरानी शुरू कर दी है। हालांकि सभी मरीजों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। इस बीमारी का प्रकोप पहले गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और दादर के तटीय क्षेत्र में देखने को मिल चुका है। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि लैप्टोसिरोसिस के जिले में पहलेे भी मामले मिलते रहे हैं। यह बीमारी चूहों के झूठा करने वाले खाद्य पदार्थों को खाने से होती है, इसके अलावा चूहों और अन्य पशुओं के मल-मूत्र से इसके प्रसार होता है।
इन इलाकों में मिले मामले
अमरिया, बिलसंडा, बिलसंडा, ललौरीखेड़ा मरौरी और अर्बन सीएचसी क्षेत्र।
रोकथाम के लिए पशु और कृषि विभाग को लिखा पत्र
सीएमओ डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि लैप्टोसाइरोसिस की रोकथाम और बचाव के लिए विभागीय स्तर से तो प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही पशु और कृषि विभाग के अफसरों को भी पत्र लिखा गया है। जिससे पशुओं और चूहों को लेकर किसानों को जागरूक किया जा सके।