पीलीभीत। जिला अस्पताल में पांच डॉक्टरों के तबादले के बाद इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई हैं। मरीजों को आधा-आधा घंटा इंतजार करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में शुक्रवार को डॉक्टरों की संख्या कम होने का असर साफ नजर आया। ओपीडी के लिए सर्जन को बैठना पड़ा। नए सीएमएस डॉ. बीएस यादव भी मरीज देख रहे थे। इसके बावजूद मरीजों को आधा-आधा घंटा कतार में इंतजार करना पड़ रहा था। मरीजों की कतार में खड़ी मरौरी की रामवती और चिड़ियादाह की वीना, गौहनिया के रामनरेश ने बताया कि आधा घंटे इंतजार के बाद डॉक्टर ने देखा लेकिन पूरी बात भी नहीं सुनी और दवाई लिखकर दे दी, क्योंकि भीड़ बहुत थी। इसी तरह से डॉक्टर मरीजों को जल्दी जल्दी निपटा रहे हैं। बताते चलें कि जिला अस्पताल से पांच डाक्टरों के तबादले हुए हैं, इनके स्थान पर ज्वाइन करने केवल दो ही डॉक्टर आए हैं। उसमें भी एक डाक्टर लंबी छुट्टी पर चले गए। मरीजों की संख्या और इमरजेंसी सेवाओं का दबाव इतना बना कि सीएमएस डॉ. विजय कुमार तिवारी लंबी छुट्टी चले गए।
नए सीएमएस डॉ. बीएस यादव ने बुधवार को ज्वाइन किया। उन्होंने बरेली जाकर अपर निदेशक स्वास्थ्य से गुरुवार को मुलाकात की। उनसे हालात बताए और कहा कि इतने कम डाक्टरों में अस्पताल की सेवाएं कैसे चलाई जाएं। इसके बाद उन्होंने सीएमओ को भी अवगत कराया। डॉक्टरों की संख्या कम होने का असर केवल इमरजेंसी सेवाओं पर नहीं बल्कि ओपीडी पर भी पड़ रहा है। सीएमएस डॉ. बीएस यादव इमरजेंसी ड्यूटी के लिए डाक्टर नहीं होने की वजह से इमरजेंसी ड्यूटी के साथ सीएमएस के पद का काम कर रहे हैं। अब उन्होंने अपर निदेशक को पत्र लिखा है।
चार इमरजेंसी मेडिकल अफसरों के पद हैं स्वीकृत, तैनाती एक की भी नहीं
जिला अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल अफसर के चार पद स्वीकृत हैं पर तैनाती नहीं है। सेवारत डॉक्टरों की इमरजेंसी ड्यूटी लगाई जाती है। उन्हें बाद में ओपीडी भी करनी है। सेवारत डॉक्टरों में भी पांच डॉक्टरों के तबादले होने से हालात और बिगड़ गए हैं।
26 डॉक्टरों के पद स्वीकृत तैनाती सिर्फ दस की
जिला अस्पताल के लिए डॉक्टरों के 26 पद स्वीकृत हैं पर तैनाती सिर्फ दस की है। फार्मासिस्ट और चीफ फार्मासिस्ट के छह पद हैं। इसमें से तीन स्थानांतरण के बाद रिलीव कर दिए गए। इस कारण सेवाएं प्रभावित हैं। इसके बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं पर संकट छा गया।
दंत चिकित्सक के कक्ष में ताला
दंत चिकित्सक का पद लंबे समय से खाली है। डेंटल हाईजीनिस्ट की तैनाती थी। उन्हें भी तबादले के बाद रिलीव कर दिया गया। इसके बाद से दंत चिकित्सक के कक्ष में ताला लगा है। वहीं रेडियोलॉजिस्ट का तबादला होने से अल्ट्रासाउंड बंद है। दांत संबंधी तकलीफ लेकर शुक्रवार को दोपहर 12.15 बजे जिला अस्पताल पहुंचे गंगा प्रसाद लोधी और कैप्टन सिंह ने जब दंत चिकित्सा कक्ष में ताला देखा तो वे सीएमएस डॉ. बीएस यादव के कक्ष में पहुंच गए। उनका कहना था कि उम्मीद के साथ इलाज के लिए आए थे। निराशा हाथ लगी।