पीलीभीत। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ जीवित शिशु को मृत दर्शाने और फिर महिला की जान को खतरा बताकर गर्भपात के लिए दबाव बनाने के मामले में ओजस्वी डायग्नोस्टिक सेंटर संचालिका के गलती स्वीकारने पर दरियादिली दिखाने वाले अफसरों को जोर का झटका धीरे से लगा है। लगातार हो रही फजीहत से खफा होकर डीएम ने सख्ती दिखाई तो बुधवार को डायग्नोस्टिक सेंटर का लाइसेंस 24 अक्तूबर तक के लिए निलंबित कर दिया गया। इस अवधि में कार्य होता मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
टनकपुर हाईवे स्थित ओजस्वी डायग्नोस्टिक सेंटर पर न्यूरिया निवासी नदीम ने 24 जुलाई को अपनी पत्नी नेहा परवीन का अल्ट्रासाउंड कराया था। जहां अल्ट्रा साउंड की रिपोर्ट में जीवित गर्भस्थ शिशु को मृत दर्शा दिया गया था। गांधी स्टेडियम रोड स्थित महिला का चेकअप करने वाली महिला डॉक्टर ने नेहा की जान को खतरा बताकर तुरंत गर्भपात कराने के लिए दबाव बनाया था। शक होने पर नदीम ने जिला अस्पताल समेत तीन सेंटरों पर जांच कराई तो रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ और सामान्य बताया गया। मामला कई दिन टालने के बाद डीएम के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। पैनल में शामिल डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. जगदीश प्रसाद, डॉ. पुष्पा पंत ने छह सितंबर को डायग्नोस्टिक सेंटर की संचालक डॉ. ओजस्वी शर्मा, एबॉॅर्शन का दबाव बनाने वाली महिला डॉक्टर और शिकायतकर्ता नदीम के कर बयान दर्ज किए। इसमें डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक डॉ. ओजस्वी शर्मा ने अपने बयान में गलत रिपोर्ट देने की बात स्वीकार की थी। फिर भी गर्भपात का दबाव बनाने वाली महिला डॉक्टर को यह कहकर बख्श दिया गया था कि उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस प्रकरण के बाद से डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर सत्ताधारी नेताओं से पैरवी कराई। इससे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को भी बैकफुट पर आना पड़ा और गलती स्वीकारने के बाद भी महज चेतावनी देकर आरोपी डॉक्टर को छोड़ दिया गया। इससे प्रशासन की फजीहत होने लगी। कार्रवाई न होने से प्रशासनिक अफसर सवालों के घेरे में आ गए। लिहाजा इस प्रकरण में डीएम वैभव श्रीवास्तव ने सख्ती दिखाई। बुधवार को सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने 24 अक्तूबर तक के लिए ओजस्वी डायग्नोस्टिक सेंटर का लाइसेंस निलंबित कर दिया।
साठगांठ और नेताओं की पैरवी भी नहीं आई काम
इस प्रकरण में कार्रवाई से बचने को डायग्नोस्टिक संचालक के अलावा कई डॉक्टरों ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर एड़ी से चोटी तक जोर लगाया। सत्ताधारी नेताओं से सिफारिशें भी कराईं, लेकिन उनको कामयाबी नहीं मिल सकी। लिहाजा, करीब एक माह की टालमटोल के बाद आखिकर डीएम ने सख्ती दिखाई तो लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।
ओजस्वी डायग्नोस्टिक सेंटर संचालिका ने अपने बयान में अल्ट्रासाउंड की गलत रिपोर्ट जारी होने की बात स्वीकार की है। पैनल में शामिल तीन डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट के बाद बुधवार को 24 अक्तूबर तक के लिए अल्ट्रासाउंड सेंटर का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इस अवधि में यदि सेंटर पर कार्य होता मिला तो कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल