फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिस्टम नाकरा: गिने चुने लोगों के बने गोल्डन कार्ड.. गरीब तो अब भी इलाज को तरस रहे

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। इसे सिस्टम की नाकामी ही कहेंगे, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना संचालित हुए एक साल बीत गया, बावजूद इसके अफसरों की उदासीनता की वजह से लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है। हर कोई मुफ्त इलाज के लिए गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए भटक रहा है। योजना की पात्रता सूची से गरीब तबके का एक बड़ा हिस्सा वंचित हैं, ये तंगहाली में बीमारी का इलाज नहीं करा पा रहा है। इन हालात में किसी ने बीमारी के लिए अपना घर बेच दिया है, तो कोई पैसा न होने की वजह से इलाज नहीं करा पा रहा और बेचारगी में जीने को मजबूर है। अमर उजाला ने आयुष्मान भारत योजना को लेकर पड़ताल शुरू की, तो ऐसे लोग लगातार सामने आ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग के अफसर कटघरे में हैं। लोग कॉल करके पूछ रहे हैं कि गोल्डन कार्ड कैसे बनेगा, हम पात्रता की सूची में क्यों नहीं है, जबकि हमारी आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है।
विज्ञापन

एक साल में मात्र 13 फीसदी लोगों के बने कार्ड
पीलीभीत। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना का संचालन किया था। जिले में 23 सितंबर 2018 को लांच की गई योजना के तहत 1.73 परिवार चयनित किए गए। इन परिवारों के प्रत्येक सदस्य का गोल्डन कार्ड बनाया जाना है। जनपद में तकरीबन छह लाख कार्ड बनाए जाने हैं, लेकिन साल भर में केवल 13 फीसदी यानी 75 हजार ही कार्ड बन सकें। ऐसे में साफ है कि मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल गुजरने के बाद भी पूरे कार्ड नहीं बनाए जा सकेंगे। इतनी कम संख्या में कार्ड क्यों बने? इसकी पड़ताल कि तो स्वास्थ्य और पंचायत राज विभाग की उदासीनता उभरकर सामने आई। दरअसल दोनों विभाग अपने जिम्मे का कार्य करने में दिलचस्पी ही नहीं दिखा रहे। जिला पंचायत राज विभाग को ग्राम सभाओं की खुली बैठक में पात्रों की सूची पढ़कर सुनाने के साथ ही चस्पा कराने के निर्देश थे, लेकिन ज्यादातर गांवों में सूची सार्वजनिक ही नहीं की गई। इस वजह से पात्रता को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है।
आशा वर्करों को भी नहीं है सही जानकारी
पीलीभीत। देश की सबसे बड़ी प्रधानमंत्री की आयुष्मान भारत योजना की जिम्मेदारी मुख्य रूप से स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने आशाओं को दी है। उनको ही शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पात्र लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड की जानकारी देना है, लेकिन अनुभवहीन आशाओं की वजह से योजना को पलीता लगा रहा है। कहां, कैसे, पात्रता की श्रेणी क्या है, किनके गोल्डन कार्ड बनाए जा सकते हैं इसकी उनको कोई जानकारी नहीं है।
विज्ञापन

फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद भी नहीं लिया सबक
पीलीभीत। देशनर स्थित राजपूत जनसेवा केंद्र पर पात्र लाभार्थियों को योजना से वंचित कर उनके स्थान पर अपात्रों से मोटी रकम लेकर गोल्डन कार्ड बनाने का फर्जीवाड़ा पकड़ा था। वाहवाही लूटने को डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर आनन-फानन में जनसेवा केंद्र संचालक के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी, लेकिन जालसाजों का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। जो ठिकाने बदलकर पात्रों को वंचित करने को फर्जीवाड़ा करने में लगे हैं।
निजी अस्पतालों के आयुष्मान मित्रों का पता नही
पीलीभीत। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के छह प्राइवेट अस्पतालों को भी संबद्ध किया गया है। इन अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज के साथ ही गोल्डन कार्ड बनाने का निर्देश है। इसके लिए आयुष्मान मित्र की भी तैनाती करने की व्यवस्था है। लेकिन इनमें कई अस्पतालों में आयुष्मान मित्रों का कोई अतापता ही नहीं है। यहां आने वाले मरीजों के ही गोल्डन कार्ड बनाकर भर्ती किए जाते हैं। यदि कोई पात्र सिर्फ कार्ड बनवाने जाए तो उसे मना कर दिया जाता है।
ऐसे गोल्डन कार्ड का क्या फायदा, जब नहीं मिला लाभ
पीलीभीत। आयुष्मान भारत योजना में गोल्डन कार्ड पाते ही बीपीएल परिवार बीमार होने पर बेफिक्र हो जाता है कि वह पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज करा ही लेगा। लेकिन कई मामले ऐसे सामने आए, जिसमें बीमार होने पर सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में पात्र लाभार्थियों को निराशा हाथ लग रही है। उनको विकल्प के तौर पर बीमारी के नाते रिश्तेदारों या साहूकारों की चौखट पर नाक रगड़नी पड़ रही है। कर्ज लेकर इलाज कराना पड़ रहा है। वहीं कई रसूखदारों के गोल्डन कार्ड जारी हुए हैं।
यह बात सही है कि काफी कम संख्या में गोल्डन कार्ड जारी हुए हैं। हमारी ओर से अधिक से अधिक गोल्डन कार्ड जारी हों। योजना में चयनित हुए लाभार्थियों के लिए विशेष कैंप ब्लॉक मुख्यालय और गांवों में लगाए जा रहे हैं। बावजूद इसके लाभार्थी गोल्डन कार्ड बनवाने में रुचि नहीं दिखा रहे। - डॉ. सीमा अग्रवाल सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें