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मरीज लाचार, नहीं है सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा

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पीलीभीत। केंद्र व प्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना के अंतर्गत गरीबों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा तो दी, लेकिन जिलेवासियों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर रत्तीभर भी भरोसा नहीं है। वजह सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट नहीं है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि योजना के अंतर्गत जिले के करीब 1200 लोगों ने ही सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में 3500 लोग विभिन्न बीमारियों का इलाज करा चुके हैं। योजना में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सामुदायिक केंद्र बीसलपुर को शामिल किया गया है। इसके अलावा छह प्राइवेट हॉस्पिटलों को भी इसमें सम्मिलित किया गया है।
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आयुष्मान भारत योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल हैं। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2018 को की थी। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को पांच लाख तक का मुफ्त इलाज देना है। इसके लिए वर्ष 2011 की आर्थिक एवं सामाजिक जनगणना के आधार पर जिले में करीब 1.73 लाख पात्रों का चयन किया गया है। यानी कार्डधारक पांच लाख रुपये तक का इलाज चयनित अस्पतालों में मुफ्त करा सकता है। सरकारी अस्पतालों की बात करें तो यहां डॉक्टरों का भारी टोटा है। वर्तमान में जिला अस्पताल में ईएनटी, कार्डियोलॉजिस्ट, सर्जन, एनेस्थिसिया आदि स्पेशलिस्टों की लंबे समय से कमी चल रही है। इसलिए गोल्डन कार्ड होने के बाद भी गंभीर मरीजों को यहां इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ हैं। आयुष्मान योजना के डॉ. अटल मणि शुक्ला ने भी माना कि सरकारी की अपेक्षा प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज को कराना लोग अच्छा समझते हैं। क्योंकि सरकारी अस्पतालों में निजी हॉस्पिटलों की अपेक्षा संसाधनों का अभाव है।
निजी अस्पतालों में भी विशेषज्ञ डाक्टरों की है कमी
सरकारी अस्पताल के अलावा जिले के निजी अस्पतालों में भी कई बड़े विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। इससे ऑपरेशन के गंभीर और बड़े मामले लेने से अस्पताल इंकार कर देते हैं। इसके चलते गंभीर मरीजों को या तो जनपद से बाहर रास्ता देखना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों से समझौता करना पड़ रहा है।
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30 तक लाभार्थियों के कैंप में बनेंगे गोल्डन कार्ड
आयुष्मान योजना के जिला सूचना प्रबंधक विवेक मिश्रा ने बताया कि जिन लोगों के पास प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की चिठ्ठी पहुंची है केवल उन लोगों के गोल्डन कार्ड मुहैया कराने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। जो 30 सितंबर तक चलेगा। ब्लॉक लेवल के सभी स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा ग्राम पंचायतों में भी कैंप लगाकर योजना में चयनित लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। किसी नए व्यक्ति को यह विशेष सुविधा नहीं मिलेगी।
निजी अस्पताल जाने की दे दी सलह
सैदपुर के प्रेम बहादुर ने बताया कि काफी भागदौड़ के बाद पात्र गरीब लाभार्थी होने के चलते उनका गोल्डन कार्ड तो बन गया लेकिन जब बीते दिनों जिला अस्पताल पहुंचे तो डाक्टरों ने गोल्डन कार्ड होने का पता चलने पर बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल जाने की सलाह दे दी।
उम्मीद से बनवाया पर काम न आया गोल्डन कार्ड
मंडरिया के सीताराम ने बताया कि आयुष्मान योजना में नाम आने पर उसने गोल्डन कार्ड बनवाया। पांच लाख रुपये तक इलाज मिलने से ठीक होने की उम्मीद बंधी। इलाज कराने गोल्डन कार्ड लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो डाक्टरों ने बताया कि कार्ड में यह बीमारी शामिल नहीं है। इससे आयुष्मान कार्ड से भी उम्मीद टूट गई।
योजना से जुड़े सभी सरकारी हो या प्राइवेट अस्पताल मरीजों को इलाज की निशुल्क सुविधा मिल रही है। कुछ बीमारी ऐसे ही जो योजना में शामिल नहीं है। पैनल में शामिल डॉक्टर यदि गोल्डन कार्ड होने के बाद भी लाभार्थियों को भर्ती नहीं कर रहे तो निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी। योजना में चयनित हुए लाभार्थियों के लिए विशेष कैंप भी आयोजित किए जा रहे हैं। - डॉ. सीमा अग्रवाल सीएमओ
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