फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मान गए उस्ताद! तुम तो निकले मुन्ना भाई एमबीबीएस

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। लाश को वेंटिलेंटर पर रखकर इलाज करने और फर्जी डिग्री से अस्पताल संचालित करने के आरोपी डॉक्टर की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं है। डॉक्टर की डिग्रियों से जुड़े तमाम साक्ष्य जुटाकर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम मुंबई से लौट आई है। अब मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष से मिले कागजात पर मंथन कर अफसर अग्रिम कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं। सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेज से मिली रिपोर्ट के आधार पर इतना स्पष्ट हो गया है कि डॉक्टर खुद सर्जरी नहीं कर सकते थे। वह सिर्फ सहायक के तौर पर काम कर सकते थे। हालांकि अभी अधिकारी इस मामले में कुछ भी बताने से बच रहे हैं।
विज्ञापन

बीते दिनों एक अस्पताल के चिकित्सक की शिकायत हुई थी। उन पर लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज के नाम पर घरवालों से एक लाख रुपये वसूलने और फर्जी डिग्री से अस्पताल संचालित करने का आरोप था। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल सील करने के बाद धोखाधड़ी, कूटरचित अभिलेख तैयार करने समेत संगीन धाराओं में उनके खिलाफ सुनगढ़ी थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी थी। डॉक्टर की एमएस और एमसीएच की डिग्री की जांच के लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम मुंबई गई थी। कई दिन मुंबई में जांच-पड़ताल करने के बाद टीम ने वहां के किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज में सर्जरी के विभागाध्यक्ष से मुलाकात की। टीम प्रकरण से जुड़े कई अभिलेख साथ लाई है। हालांकि इनसे संबंधित जानकारी अधिकारी अभी सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। उनका अध्ययन कर अग्रिम कार्रवाई पर मंथन किया जा रहा है। हालांकि सूत्र इतना जरूर कह रहे हैं कि आरोपी डॉक्टर के पास ऐसी कोई डिग्री नहीं है, जिससे वह सर्जरी के लिए अर्ह हों, लिहाजा वह खुद सर्जरी करने के बजाय किसी सर्जन के साथ बतौर सहायक ही काम कर सकते हैं।

एसपी कुछ इस तरह कर गए बचाव
एसपी मनोज कुमार सोनकर से जब इस मामले में पूछा गया तो वह भी बचाव करते नजर आए। कहा कि मुंबई से टीम वापस आ गई है या नहीं। अभी इसको लेकर पुष्ट जानकारी उनके पास नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें