फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हद हो गई साहब, सीएम का हुक्म भी नहीं मानता सेहत महकमा

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग की कहानी भी निराली है। यहां अल्ट्रासाउंड मामले की जांच करने से डॉक्टर इनकार कर देता है तो डीएम साहब छापा मारते हैं तो सीएमओ बीच में ही चली जाती हैं। डीएम के बुलाने पर भी बाबू नहीं आता। ऐसे में मरीजों की सुनवाई क्या होती होगी समझा जा सकता है। इसी क्रम में सड़क हादसे में घायलों को तत्काल इलाज मिले और उनकी जान जोखिम में न पड़े, इसको लेकर सरकार भले ही गंभीर हो, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसको लेकर गंभीर नहीं है। कुछ अफसरों के लापरवाह रवैये के चलते 108 एंबुलेंस को चौराहों पर खड़ा करने के मुख्यमंत्री के सख्त आदेश हवा में उड़ा दिए गए हैं। एंबुलेंस चालक इसका पालन नहीं कर रहे। आलम यह है कि अस्पताल परिसर में ही अधिकतर एंबुलेंस खड़ी हो रही हैं। यही वजह है कि जरूरतमंद के फोन करने पर उन्हें पहुंचने में समय लगता है।
विज्ञापन

बता दें, पिछले दिनों गोला में एक घायल शख्स की समय से एंबुलेंस नहीं पहुंचने से मौत हो गई थी। इस प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही उजागर हुई थी और गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ था। यह मामला जब सीएम योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में पहुंचा तो इसको लेकर सख्त आदेश दिया गया कि 108 एंबुलेंस को शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य चौराहों पर खड़ा किया जाए ताकि घायल को तत्काल मदद मिल सके। लेकिन मुख्यमंत्री के इस आदेश को हवा में उड़ा दिया। यहां तो अस्पताल परिसर को ही पार्किंग बना दिया गया है। सरकारी अस्पतालों में 102 एंबुलेंस को रिजर्व रखने की बात भी कही थी, ताकि जरूरतमंद को समय रहते आसानी से सुविधा मिल सके। इस पर भी अमल नहीं हो सका। शहर के छतरी, नौगवा, असम, गौहनिया समेत कई अन्य चौराहों पर पड़ताल में एंबुलेंस खड़ी नहीं मिलीं।
एंबुलेंस खड़ी करने की जगह चिह्नित की गई है। इस पर अमल भी किया जा रहा है। जल्द ही इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू कराया जाएगा ताकि रिस्पांस टाइम में एंबुलेंस मरीज तक पहुंच सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

- डॉ. अश्वनी गुप्ता, प्रभारी सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें