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Pilibhit News: डायलिसिस केंद्र से रोज 30 किडनी रोगियों को मिल रही संजीवनी

Tue, 09 Dec 2025 11:51 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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डायलिसिस केंद्र में मरीजों का ब्लड फिल्ट्रेशन करती मशीनें। संवाद
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पीलीभीत। जिले के सैकड़ों किडनी रोगियों के लिए जिला अस्पताल का डायलिसिस केंद्र पिछले चार साल से किसी संजीवनी से कम साबित नहीं हो रहा है। यहां नियमित चार तीन शिफ्टों में दस बेडों पर मरीजों के ब्लड फिल्ट्रेशन का काम किया जाता है। चार सालों में कुछ लोगों ने तो भले ही अपनी जिंदगी बढ़ती बीमारी और घटती आयु के चलते गवां दी लेकिन 270 लोग सालों से सप्ताह में यहां आकर अपने जीवन को बढ़ा रहे हैं। इससे नियमित आने वाले रोगियों का विश्वास केंद्र की ओर से बढ़ गया है।
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जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र के सामने बने डायलिसिस केंद्र की स्थापना 31 दिसंबर 2021 में हुई थी। तब प्राइवेट केंद्रों पर पैसे देकर अपनी जिंदगी बचाए रखने वालों को सबसे बड़ी निशुल्क सहूलियत हुई। अब तक डायलिसिस पर 300 से अधिक किडनी रोगियों ने आकर अपना ब्लड फिल्ट्रेशन के लिए पंजीकरण कराया। इनमें 30 प्रतिशत संख्या युवाओं की भी रही। लगभग 35 लोगों ने अपनी बढ़ती उम्र और परेशानियों के चलते अपनी जान गवां दी। हालांकि अभी भी केंद्र पर 270 मरीजों का एक माह में ब्लड फिल्ट्रेशन का कार्य किया जाता है। केंद्र संचालक चिकित्सक रजनीश कुमार ने बताया कि रोज सुबह 7.30 से 11.00, 12.00 से 4.00 व 05 से 09 बजे तक तीन शिफ्ट लगती है। सेंटर में दस बेड संचालित किए जाते हैं। कुल तीस लोगों का ब्लड फिल्ट्रेशन होता है। लगभग लोग ऐसे हैं जिसमे केंद्र स्थापना से लोग लगातार आ रहे हैं और ब्लड फिल्ट्रेशन कर जीवन का समय बढ़ा रहे हैं।

केंद्र पर है इतना स्टाफ
संचालक ने बताया कि केंद्र पर एक चिकित्सक, दो सीनियर टेक्निशियन, एक स्टाफ नर्स और दो वार्ड बॉय कार्यरत हैं। ये लगातार केंद्र पर आने वाले किडनी रोगियों की सेवा करते हैं।
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केंद्र की शुरूआत के पहले ही मेरी किडनी खराब हो गई। आज भी मेरा ब्लड फिल्ट्रेशन होता है। जब से केंद्र खुला है मेरा जीवन विभाग ने बचा रखा है। - तनवीर

कम उम्र में किडनी खराब होना मेरे जीवन के लिए काफी समस्या पूर्ण है। फिर भी केंद्र पर नियमित आकर ब्लड फिल्ट्रेशन कराता हूं। - समीर
युवाओं में युवाओं में अनियमित दिनचर्या से बढ़ रहा किडनी रोग, चिकित्सक ने दी सलाह



जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि युवाओं में अनियमित दिनचर्या, प्रदूषित खानपान, जंक फूड, कम पानी पीना, धूम्रपान-शराब, बिना जरूरत दर्दनाशक दवाओं के प्रयोग से किडनी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। देर से पहचान होने पर स्थिति गंभीर होकर डायलिसिस तक पहुंच जाती है। उन्होंने सलाह देते हुए बताया कि समय पर जांच, पर्याप्त पानी, कम नमक, नियमित व्यायाम, ब्लड शुगर-बीपी नियंत्रण और दवाओं का चिकित्सकीय सलाह पर ही सेवन किडनी को सुरक्षित रखता है। पैरों में सूजन, भूख कम होना व पेशाब में बदलाव दिखे तो चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। संवाद
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