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वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षण तो दूर, स्टाफ नर्स ही नहीं ढूंढ पाए

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पीलीभीत। कोरोना संक्रमितों का इलाज करने में स्टाफ और संसाधन की कमी शुरूआत से ही बनी हुई है। वेंटिलेटर चलाने को स्टाफ भी नहीं है। संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद अधिकांश मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ रही है। मगर वेंटिलेटर चलाने वाले ही नहीं मिल सके हैं। 32 स्टाफ नर्स को प्रशिक्षित कराने की बात तो दूर स्वास्थ्य विभाग इनको ढूंढ कर सूची भी नहीं बना सका है। कोविड अस्पताल में डॉक्टर और अन्य स्टाफ की भर्ती को लेकर भी प्रक्रिया सिर्फ कागजों में ही चल रही है।
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पिछले साल जिला महिला अस्पताल के एमसीएच विंग में कोरोना संकट काल में एल-2 कोविड अस्पताल बनाया गया था। जहां 16 वेंटिलेटर भी मिले थे। कंपनी के इंजीनियर ने आकर उन्हें लगा तो दिया, मगर उन्हें चलाने के लिए कोई भी ऑपरेटर नहीं मिल सका। कोरोना की पहली लहर में तो कोई खास दिक्कत नहीं आई थी, मगर संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद संक्रमित निकलने वाले 70 फीसदी मरीजों को वेंटिलेटर और बाई पाइप की जरूरत पड़ रही है, लेकिन वह शुरू नहीं हो सके हैं। 17 अप्रैल को प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश जारी किए थे, कि वह 32 स्टाफ नर्सो को ढूंढकर प्रशिक्षण दिलाए। ताकि बाद में उन्हीं से वेंटिलेटर चलवाए जा सकें। मगर इस पर आगे कोई काम नहीं हो सका। अभी तक वेंटिलेटर शुरू नहीं हो सके। सिर्फ ऑक्सीजन सिलिंडर के सहारे ही गंभीर मरीजों का इलाज जैसे-तैसे किया जा रहा है। अगर किसी मरीज का तीमारदार वेंटिलेटर के लिए पूछता है, तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। संसाधन होने के बाद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
डॉक्टर और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की फाइल भी दबी
संक्रमण की दूसरी लहर में डॉक्टर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदार सीधे अपने मरीज के संपर्क में बने हुए है। जिससे उन्हें भी संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। इसके लिए शासन ने तीन डॉक्टर और 24 पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती करने का कहा था, मगर शासन का आदेश मिलने के बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए लखनऊ की एक फर्म से डिमांड की गई थी। इसके अलावा एनआरएचएम के माध्यम से तीन एमबीबीएस डॉक्टरों की मिलने वाली फाइल भी दब गई है।
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वेंटिलेंटर चलने की प्रक्रिया चल रही है। आवश्यकता पड़ने पर वहां कार्यरत एनेस्थेटिक चलते हैं। स्टाफ नर्स सूची बनाई जा रही है। जल्द ही उनका प्रशिक्षण कराया जाएगा। आउटसोर्सिंग में आठ कंप्यूटर ऑपरेटर मिल चुके हैं, जल्द ही डॉक्टर मिलने की उम्मीद हैं। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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