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...लो आ गया बरकतों व रहमतों से भरपूर महीना 

Sat, 27 May 2017 11:04 PM IST
पीलीभीत
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रमजान - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूूरेेा
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रमजान मुकद्दस
सिर्फ रोजा रखने का नहीं, अपने अंदर झांकने का भी मौका देता है रमॐान

 रमजान का मतलब सिर्फ रोजा रखना नहीं है। यह खास महीना अपने अंदर झांकने और नेकी को अपनाने की राह दिखाने वाला है। इसीलिए कहा गया है कि रमॐान का एहतिमाम जितना जरूरी है उतना ही एहतराम भी लाजिम है। अल्लाह तआला इस माह में रोजेदारों को नेमतों और बरकतों से नवाजता है। 
मौलाना अब्दुल जलील निजामी बताते हैं कि रमॐान माह को अल्लाह तआला ने अपना महीना कहा है। इसकी कुछ तो वजह होगी। कुछ पैगाम होंगे। कुछ नसीहतें होंगी। जिन्हें अल्लाह तआला अपने बंदों तक पहुंचाना चाहता है। अल्लाह बंदों से चाहता है कि वह नेकी करें और नेकी का पैगाम दें। मगर इंसान न जाने किस गफलत का शिकार है कि अपना कुछ भी न होते हुए भी सब कुछ अपना समझता है। गौर करने की बात है कि अगर सब कुछ अपना होता तो लोग मरते वक्त उसे अपने साथ ले जाते। मरते वक्त तो सिर्फ अपने कर्म और नेकियां ही साथ जाती हैं। साल के 11 महीने इसी गफलत में बीत जाते हैं और 12वां महीना इंसान को एहसास कराने के लिए आता है। अल्लाह तआला इंसान को मौका देता है कि बंदे सोच, यह कायनात किसकी है? इसका पालनहार कौन है? पेट भरने का इंतेजाम किसके हुक्म पर होता है? देखने, सुनने, खाने-पीने, लेटने-बैठने और चलने फिरने की ताकत और हिम्मत कहां से मिलती है? कौन है जो पल-पल की खबर रखता है? जाहिर है यह अल्लाह के सिवा कोई नहीं। यही वह नसीहतें और पैगाम हैं जो रमजान में अल्लाह की तरफ से दिए जाते हैं। 
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हदीस की रोशनी में राोजा
एक हदीस में आता है कि अगर किसी ने बुरी आदतें नहीं छोड़ी तो अल्लाह को परवाह नहीं कि उसने खाना पीना छोड़ दिया है।रमजान हकीकत में एक इम्तिहान है। काम से किरदार तक हर चीज का इम्तिहान। इसीलिए रोजे की हालत में बुराई देखने, सुनने, करने, बुराई की तरफ कदम बढ़ाने से रोका गया है। रोजा सिर्फ खाना पीना छोड़ देने से ही पूरा नहीं होता। बल्कि तमाम ऐबों से पाकी हासिल करने से ही रोजेदार को रोजे का बदला नेमतों और बरकतों के रूप में मिलता है। 

रोजों का एहतिमाम और एहतराम लाजिम
मौलाना अब्दुल करीम नूरी बताते हैं कि रमजान के रोजों की नियत करना वाजिब है। जो शख्स रोजे के तमाम पहलुओं पर कायम रहते हुए अल्लाह की इबादत करता है, उसके नाम-ए-आमाल में सत्तर गुना सवाब लिखा जाता है। वह बताते हैं कि कुरआन इसी महीने में नाजिल किया गया। लोगों को चाहिए कि रमजान शरीफ में रोजों का एहतिमाम करें और कुरआन की तिलावत करें और रोजेदार का एहतराम करें।

इन चीजों से रखें परहेज
रोजे की हालत में फिल्म देखने, गाने सुनने व देखने, झूठ बोलने, गीबत और चुगली करने, तमाम बुरे कामों से दूर रहने की ताकीद की गई है। 

कुछ मसायल यह भी
आंखों में सुरमा लगाने, सिर में तेल लगाने, कपड़ों में खुशबू लगाने और सूंघने से रोजा नहीं टूटता। इसी तरह जरूरत पडने पर इंजेक्शन लगवाने, जिस्म पर दवा का लेप या मालिश करने और भूल से कुछ खा पी लेने से भी रोजा नहीं टूटता। 

इन हालतों में है रोजे से छूट
तीन दिन की नियत से सफर में रहने वाले, गंभीर रूप से बीमार या बहुत ज्यादा कमजोर बुजुर्ग, हामला (गर्भवती) औरत, बच्चों को दूध पिलाने वाली मां को रोजे से छूट दी गई है।
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रमॐान की आमद की खुशी में सजे बाजार

रमॐान की आमद की खुशी में आज बाजारों में रौनक बढ गई। सहरी के लिए खजला, फेनी, रमजानी स्पेशल ब्रेड, स्पेशल जलेबी बगैरा की खास तौर पर दुकानदारों ने तैयारी की है। इफ्तार के लिए खजूर, फ्रूट, मेवे, अनेक तरह के शरबत वगैरा से दुकानों को सजाया गया है। 
 
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