टाइगर रिजर्व से बाहर आकर मानव पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले डेढ़ माह में बाघ के हमले में तीसरी मौत है जिससें दो मौते एक ही गांव पिपरिया संतोष की हैं जबकि एक घटना पड़ोस के गांव डगा में हुई थी। माधोटांडा थाना क्षेत्र के गांव पिपरिया संतोष और डगा का क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा बराही और कुछ हिस्सा महोफ जंगल से सटा हुआ है। 27/28 नवंबर की रात खेत पर सिंचाई करने गए पिपरिया संतोष के 52 वर्षीय बाबूराम पर बाघिन ने हमला कर मार डाला था। अगले दिन वनविभाग ने बाघिन को पकडने के लिए हाथी भी मंगाए साथ ही ट्रैंक्यूलाइजिंग एक्सपर्ट भी पहुंचे लेकिन बाघिन चकमा देकर भाग गई। इसके कुछ दिन बाद ही 11 दिसंबर को हरदोई ब्रांच नहर पार इसी बाघिन ने डगा निवासी 22 वर्षीय अहमद खां को उस समय मार डाला था जब वह अपने साथी के साथ नहर पर पानी लेने गया था। इन दो घटनाओं के बाद से ही ग्रामीणों में जबर्दस्त रोष है। अभी दोनों गांव में बाघिन के हमले की दहशत कम भी नहीं हुई थी कि सोमवार को पुन: पिपरिया संतोष के ही 17 वर्षीय राजीव को बाघ ने मार डाला।
कहीं खूनी बाघिन का ही हमला तो नहीं
27/28 नवंबर की रात बाबूराम पर हमला करने वाली बाघिन वनविभाग की टीम का सुरक्षा घेरा तोड़कर भाग गई थी। बाद में इसी ने डगा के युवक पर हमला किया था। गांव वालों की मानें तो राजीव पर हमला करने वाली वहीं बाघिन हो सकती है। यदि ऐसा है तो यह उसका तीसरा शिकार है। ऐसे में वनविभाग को इसे काबू में करना अथवा इसपर प्रभावी नियंत्रण के उपाय करना बड़ी चुनौती है।
रविवार/सोमवार को ही तीनों घटनाएं
पीलीभीत। बाघिन के हमले की तीनों घटनाएं रविवार/सोमवार के दिन ही हुई हैं। 27 नवंबर को रविवार था। रात में बाघिन के हमले की सूचना अगले दिन सुबह सोमवार को मिली थी। वहीं डगा गांव निवासी अहमद खां पर भी रविवार की रात हमला हुआ था जिसके चलते अन्य सभी कार्रवाई सोमवार को हुई थी। अब एक बार फिर सोमवार को ही तीसरा हमले में राजीव की मौत हुई है।
चार भाई बहनों में तीसरे नंबर का था राजीव
जमुनिया। पिपरिया संतोष निवासी नेवाराम के तीन पुत्र और एक पुत्री क्रमश: 23 वर्षीय धर्मेन्द्र, 19 वर्षीय लक्ष्मी, 17 वर्ष राजीव और 15 वर्षीय धर्मवीर थे। राजीव कलीनगर स्थित कॉलेज में 10वीं कक्षा का छात्र था। सोमवार को वह खेत की रखवाली करने गया था लेकिन वहां बाघ के हमले का शिकार हो गया। राजीव की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है। मां भाई बहन का रो रो बुरा हाल है।