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अब जिप्सी से टाइगर रिजर्व में सैर सपाटा कर सकेंगे पर्यटक

Tue, 01 Nov 2016 10:25 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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अब जिप्सी से टाइगर रिजर्व में सैर सपाटा कर सकेंगे पर्यटक - फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा
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कहने को तो टाइगर रिजर्व की वन रेंजों के सभी गेस्टहाउस व चूका बीच में बनी अधिकांश हट खूबसूरत होने के साथ वातानुकूलित हैं, लेकिन टाइगर रिजर्व प्रशासन अभी तक विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सका है। टाइगर रिजर्व प्रशासन पर्यटकों के लिए कुछ और सुविधाएं बढ़ा रहा है। इसमें से पर्यटकों के जंगल में सैर सपाटे के लिए जिप्सी वाहनों की व्यवस्था भी शामिल है। टाइगर रिजर्व प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जहां देशी पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी वह आकर्षित कर सकेंगे। टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए 15 नवंबर से खोला जाएगा। लिहाजा इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। 
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जिले में टाइगर रिजर्व काफी प्रयासों के बावजूद विदेशी पर्यटकों की आमद नहीं बढ़ सका है। जबकि इस सेंच्युरी को भी दुधवा नेशनल पार्क जैसा बनाने की योजना शुरू से ही चल रही है। कुछ मायनों में टाइगर रिजर्व दुधवा पार्क से खूबसूरत इसलिए है, क्योंकि यहां जंगलों के बीचों बीच ब्रिटिशकाल में बनाई गई नहरों का जाल है। टाइगर रिजर्व की बराही, हरीपुर, मुस्तफाबाद, माला के जंगलों में ब्रिटिशकाल के बने गेस्टहाउस जो सभी वातानुकूलित हैं और महोफ के जंगल में पर्यटकों को लुभाने के लिए चूका बीच है। चूका बीच में पानी के बीच बना बैंबो हट, साल के पेड़ों पर ट्री हट, अरण्य कुटी व दो थारू हट भी वातानुकूलित हैं, लेकिन इन सबके बावजूद टाइगर रिजर्व प्रशासन विदेशी पर्यटकों को अब तक आकर्षित करने में सफल नहीं हो सका। 
पर्यटकों के लिए शुरू होगी जिप्सी सुविधा
टाइगर रिजर्व 15 नवंबर से पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है। वहीं चूका बीच में सभी हटों की सफाई व रंगाई पुताई का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पर्यटकों को हालांकि इस बार कुछ नया देखने को नहीं मिलेगा, लेकिन जंगल में उनके सैर सपाटे के लिए जिप्सी वाहन की व्यवस्था की जा रही है। वन संरक्षक वीके सिंह ने प्रवेश द्वार एक व चार पर पर्यटकों के लिए जिप्सी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने जंगलों की सड़कों को दुुरुस्त करने के साथ अन्य व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश सभी वन क्षेत्राधिकारियों को दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक दो वर्षों से बढ़े बेतहाशा किराया दरों के भी कम होने की संभावनाएं हैं।  
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