शहर के मोहल्ला पकड़िया स्थित गुरुद्वारा छेवीं पातशाही पर सुबह से ही सिख श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। ठीक दस बजे गुरू ग्रंथ साहिब की छत्रछाया व पंच प्यारे की अगवानी में हजारों सिखों ने महान नगर कीर्तन निकालना शुरू कर दिया। जो बरेली गेट, लकड़ी मंडी, नौगवां चौराहा, छतरी चौराहा, थाना सुनगढ़ी, जेपी रोड होते हुए वापस चार बजे गुरुद्वारा छवीं पातशाही पहुंच समाप्त हो गया। सबसे आगे गतका पार्टी हैरतअंगेज कारनामे दिखाते चल रही थी। उसके पीछे नानकमता से आए स्कूली बच्चे स्कूल बैंड के साथ चल रहे थे। उसके पीछे शहीदों की झांकियां थी। इसके पीछे पंच प्यारे, फिर गुरू की सवारी, उसके पीछे रागी व डाडी जत्थे में शामिल लोग कीर्तन करते चल रहे थे। रागी जत्थों में शामिल लोग-
सूरा सो पहिचानिए जो लड़े दीन के हेत।
पुर्जा-पुर्जा कट मरे कभी न छोड़े खेत।
वह परगट्यों मर्द अगमड़ा, वरियाम अकेला।
वाहो-वाहो, गोविंद सिंह आपे गुरु आपे चेला।।
आदि के जरिये गुरु गोविंद सिंह जी की महिमा का बखान करते चल रहे थे।
हैरत अंगेज प्रदर्शन से सभी हतप्रभ
बाबा दीप सिंह अखाड़ा बरेली की गतका पार्टी में शामिल लोगों ने हैरत में डाल देने वाले कारनामे दिखा सभी को हतप्रभ कर दिया। टीम में शामिल सदस्यों में से किसी ने कील के ऊपर सिर रख कर बर्फ की सिल्ली हथौड़े से तोड़वाई तो किसी ने पैर पर ईंट रख कर तोड़वाई। ढाल-तलवार से युद्ध का प्रदर्शन किया तो कुछ ने जमीन पर लेट कर ऊपर से बाइक गुजरवाई।