खाद का कारोबार करना अब आसान नहीं होगा। शासन ने इसके लिए विज्ञान या कृषि
से स्नातक अथवा कृषि विज्ञान का डिप्लोमा अनिवार्य कर दिया है। पहले से
खुली दुकानों के नवीनीकरण को इससे अलग रखा गया है।
कृषि उपज बढ़ाने में
खाद रसायनों का उपयोग काफी अहम है। सीमित क्षेत्रफल में अधिक उत्पादन लेने
को किसान खेतों में खाद का खूब प्रयोग करते हैं। इसमें खाद व्यापारी भी
कृषि एवं रसायनों की जानकारी के अभाव में किसानों को अपने हिसाब से खाद बेच
रहे हैं। इसका सीधा असर मिट्टी की सेहत पर पड़ रहा है।
मृदा सरंचना
बिगड़ने के साथ ही उर्वरता भी घट रही है। इस पर अंकुश लगाने को कृषि
मंत्रालय ने अब खाद व्यवसाय का लाइसेंस लेेने को कृषि/ विज्ञान वर्ग से
स्नातक अथवा कृषि में डिप्लोमा की अनिवार्यता कर दी है। भारत सरकार का
शासनादेश जिला मुख्यालय को प्राप्त हो गया है।
जारी शासनादेश में यह नियम
अभी केवल नए लाइसेंस लेने वालों पर ही लागू होगा। पहले से चल रही खाद की
दुकानों और कीटनाशक के लाइसेंस पर यह शासनादेश लागू नहीं होगा।
किसानों को मिलेगा लाभ
लाइसेंस
के लिए बने नए नियम का सही लाभ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी होने
पर मिलेगा। इसके लिए केंद्र ने पहले ही शासनादेश जारी कर रखा है। मृदा
कार्ड ले जाकर किसान जब दुकान पर पहुंचेंगे तो कृषि और रसायन की जानकारी
होने के कारण दुकानदार मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार खाद दे सकेगा।
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खाद
की दुकान का लाइसेंस लेने को स्नातक की अनिवार्यता कृषि मंत्रालय ने लागू
कर दी है। इसका शासनादेश प्राप्त हो गया है। अब खाद के जो भी नए लाइसेंस
बनेंगे वह शासनादेश के अनुसार ही बनाए जाएंगे।
डॉ. अवधेश मिश्रा, जिला कृषि अधिकारी