जिले में बाघ के बढ़ते हमले और उसे रोकने में नाकाम हो रहे वन विभाग के विरोध में आखिर कार टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र के निकट के गांवों के लोग पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा की अगुवाई में सड़क पर उतर आए। जिला मुख्यालय स्थित नेहरू पार्क में आयोजित इस सांकेतिक धरने को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि किसानों के हित के लिए अगर जेल भी जाना पड़े तो वह तैयार हैं। वन विभाग, शासन व प्रशासन का रवैया बाघ के हमलों में शिकार हुए लोगों के परिवार के प्रति ठीक नहीं है। उन्होंने लोगों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने तथा पीड़ित परिवारों को 20 लाख रुपये मुआवजा दिलाने की मांग शासन से की। बाद में राज्यपाल को संबोधित 15 सूत्रीय ज्ञापन प्रभारी डीएम अजयकांत सैनी को सौंपा गया।
टाइगर रिजर्व क्षेत्र से सटे इलाके में नौ माह में 15 जान जा चुकी हैं। इन घटनाओं पर अंकुश न लगने पर सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा अपने पूर्व प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत सुबह सैकड़ों ग्रामीणों के साथ नेहरू पार्क पहुंचे और वहीं धरना देना शुरू कर दिया। इस मौके पर पूर्व मंत्री ने कहा कि तीन साल पूर्व जब टाइगर रिजर्व की घोषणा की गई थी, तब केंद्र में भाजपा की सरकार बन चुकी थी, लेकिन प्रदेश में सपा की सरकार होने के चलते केंद्र सरकार ने इसके विकास और इसकी सुरक्षा उपाय के लिए कोई धनराशि उपलब्ध नहीं कराई। यह धरना राजनीतिक उद्देश्य से नहीं किसानों की सुरक्षा के उद्देश्य से दिया जा रहा है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों एवं भाजपा नेताओं पर भी तंज कसे। कहा कि घटनाओं के बाद न तो वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं और न भाजपा नेता। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व से किसानों की सुरक्षा को सोलर तार फेसिंग कराने के लिए उनकी सरकार ने छह करोड़ का प्रस्ताव स्वीकृत कर केेंद्र सरकार को भेजा था, लेकिन एक भी धेला नहीं दिया। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व बनने से आम जनता का जंगल में प्रवेश बंद हुआ है जिसका लाभ वन विभाग के अधिकारी और वन माफिया उठा रहे हैं। प्रतिबंध के बाद भी लकड़ी कटान, मछली शिकार, शहद का ठेका एवं घास व नरकुल की कटाई अवैध रूप से कराई जा रही है। बाघ के हमले में मारे गए परिवारों को आर्थिक मदद अथवा संवेदना व्यक्त करने के बजाए अपना हक मांगने वाले पीड़ित परिवारों पर मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं। जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे यदि वापस नहीं हुए और खेतों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं कराए गए तो वह वृहद आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। धरने को पूर्व विधायक पीतमराम, जिलाध्यक्ष आनंयद सिंह यादव, उपाध्यक्ष नरेंद्र मिश्रा कट्टर सहित कई नेताओं ने भी संबोधित किया। अंत में राज्यपाल को संबोधित 15 सूत्रीय ज्ञापन प्रभारी डीएम/एडीएम अजयकांत सैनी को सौंपा गया। इस मौके पर कई गांव के सैकड़ों ग्रामीण, प्रधान एवं सपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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प्रमुख मांगे
बाघों के हमलों में मारे गए लोगों को परिवार को 20 लाख मिले मुआवजा, बाघ के हमलों में घायल हुए लोगों को पांच लाख, उत्तम इलाज की सुविधा, घटना के बाद आक्रोषित प्रदर्शनकारी किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस हों।
बाघ के हमलों में मारे गए जिन लोगों के मामले में घटना जंगल के भीतर की दर्शा वन विभाग ने मुआवजा से वंचित किया है उन्हें भी 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। बाघों को जंगल से बाहर आने से रोकने के लिए तारफेसिंग कराई जाए। इंसानों पर हमला कर रहे बाघों को चिह्नित कर उन्हें ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ चिड़िया घर छोड़वाया जाए। टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र के पांच किमी परिधि के गांवों को ओडीएफ योजना में सम्मलित कर शौचालय बनवाए जाएं तथा इन गांवों में मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाएं। चीनी मिल चलने पर जंगल से सटे गांवों के किसानों की पर्चियां पहले निर्गत की जाएं। बाघों के हमले की स्थिति में संबंधित क्षेत्र के रेंजर व फारेस्टगार्ड को जिम्मेदार माना जाए आदि मांगें शामिल हैं।