लखनऊ की शान
गोमती नदी का उद्गम स्थल लोगों की आस्था का केंद्र हैं। बड़ी संख्या में
लोग यहां आकर स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं, लेकिन बहाव न होने से इसका
पानी गंदा रहता है। जिससे दिक्कत आती है। इसको लेकर कई बार नहरों से पानी
देने की मांग उठ चुकी है। लंबे समय बाद एक बार फिर गोमती में पानी पहुंचने
की उम्मीद जगी है। पिछले दिनों यहां गोमती उद्गम स्थल से जलकुंभी हटाने काम
शुरू हुआ था साथ ही सिंचाई विभाग ने नापजोख कर प्रस्ताव तैयार किया है। 40
करोड़ के इस प्रस्ताव में हरदोई ब्रांच से निकलने वाली माधोटांडा रजवाह की
चौड़ाई बढ़ाकर उसे कुछ दूर तक पिचिंग लगाकर पक्का किया जाएगा। साथ ही
रजवाह से गोमती उद्गम स्थल तक नाला बनाने की योजना है। शारदा सागर खंड के
सहायक अभियंता वीके शर्मा और जेई वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि प्रस्ताव
बनाकर अधिशासी अभियंता के माध्यम से शासन को भेज दिया गया है।
जलक्षमता बढ़ाने को रजवाह की बढे़गी चौड़ाई
हरदोई
ब्रांच से निकलने वाली माधोटांडा रजवाह से कई माइनर निकली हैं जिससे खेतों
की सिंचाई होती है। अब इससे गोमती को भी पानी दिया जाना है। जिसके लिए
अधिक पानी की जरूरत होगी। इसके लिए सिंचाई विभाग रजवाह की चौड़ाई दो मीटर
बढ़ाएगा साथ ही रजवाह के हेड की चौड़ाई आठ से बढ़ाकर 10 मीटर की जाएगी और
दो गेट के स्थान पर तीन गेट किए जाएंगे।
प्रस्ताव की प्रमुख बातें-
-दो मीटर बढ़ेगी रजवाह की चौड़ाई
-हेड पर लगेंगे तीन गेट (फाटक)
-हेड से साइफन तक लगेगी पिचिंग
-खारजा नहर बने साइफन का पुनर्निमाण
-रजवाह से उद्गम तक बनेगा पक्का नाला
साइफन पर होगा सर्वाधिक खर्च
गोमती
को पानी उपलब्ध कराने के लिए शासन को भेजे गए 40 करोड़ के प्रस्ताव में
सर्वाधिक खर्च खारजा नहर के ऊपर से रजवाह पर बने साइफन के पुन: निर्माण पर
होगा। रजवाह की चौड़ाई बढ़ने से जर्जर हो चुके साइफन को नए सिरे से बनाया
जाएगा।
तीन डिवीजन के सहयोग से मिलेगा पानी
गोमती उद्गम
स्थल तक पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई विभाग की तीन डिवीजन का सहयोग लिया
जाएगा। हरदोई ब्रांच का संचालन हेडवर्क्स डिवीजन से हो रहा है जबकि रजवाह
का संचालन शारदा सागर विभाग से। वहीं रजवाह से गोमती तक नाले का निर्माण व
रखरखाव बाढ़ खंड डिवीजन के हवाले रहेगा।