तीन मई को गोमती उद्गम स्थल पर धार्मिक एवं सामाजिक महोत्सव का शुभारंभ किया गया था। छह दिन तक चले इस महोत्सव के अंतिम दिन सुबह यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद आरती हुई और प्रसाद वितरण किया गया। इसके बाद भागवत कथा में नेपाल से आए कथा वाचक पं. हरिशरण दास ने कृष्ण और सुदामा की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि कलियुग में ऐसी अनूठी दोस्ती देखने को नहीं मिलती। आज दोस्ती के नाम पर घात हो रहा है। महोत्सव के समापन पर आस पास गांव से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। समापन अवसर पर पं. हरिशरण दास ने अविरल धारा बहाने, गोमती के बहाव क्षेत्र में चेक डैम बनवाने, गोमती को शारदा नहर से पानी उपलब्ध कराने और इसकी सफाई कराने सहित छह कार्य का संकल्प दिलाते हुए कहा कि जब तक यह काम पूरे नहीं हो जाते, यहां धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम जारी रहेंगे। यहां माधोटांडा गुरुद्वारे की ओर से रोज की भंाति लंगर लगाकर प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर बैजनाथ सिंह, तपन अधिकारी, एमपी सिंह, ईश्वर दयाल, कमलेश सिंह, विजयपाल विक्की, रविंद्र सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।