कुछ लोग आधी आबादी को भले ही अबला मानते हों लेकिन यह वह ताकत है जो दुनिया में अपनी शक्ति का लोहा मनवा रही है। तराई के इस छोटे से जिले की आधी आबादी में भी कई ऐसी नजीर हैं जिन्होंने मुश्किलों को मात दी है। बानगी के तौर पर जिले के बा स्कूलों मेें पढ़ी कुछ बेटियों को देखा जा सकता है। बीसलपुर तहसील के गांव खनंका निवासी नीरज वर्मा का बचपन भी अन्य लड़कियों जैसा ही बीता। खेलने कूदने की उम्र में आर्थिक तंगी का अहसास व पिता जयलाल की कमी ने उसे बचपन से ही संघर्ष करना सिखा दिया। नीरज ने कक्षा पांच तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की। इस बीच परिस्थिति वश नीरज को पढ़ाई छोड़नी पड़ी। मां गोमती को बेटी के चेहरे से गायब हुई मुस्कान नहीं देखी गई। वर्ष 2008 में नीरज का दाखिला कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बीसलपुर में करा दिया। स्कूल स्टाफ के मुताबिक नीरज को शुरुआती दौर में पढ़ाई से खास लगाव नहीं था, बाद में उसमें एकाएक परिवर्तन देखने को मिला। बड़े-बड़े सपनों को आंखों में पाले नीरज ने कक्षा आठ की पढ़ाई प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। वर्ष 2013 में नीरज ने कुंवर झंकार सिंह इंटर बरसिया से हाईस्कूल 73 प्रतिशत व इंटर की परीक्षा 80 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। ग्रामीण परिवेश में पली बढ़ी होने के बाद नीरज ने अपने हौंसले कम नहीं होने दिये और आईटीआई में दाखिले के लिए आवेदन किया। मेरिट के आधार पर नीरज का चयन आईटीआई बरखेड़ा में इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में हो गया। जहां वह अंतिम वर्ष की शिक्षा ग्रहण कर रही है।
जल्द बनेगी डाक्यूमेंट्री फिल्म
एक वक्त था जब नीरज की पढ़ाई छूट गई, लेकिन उसने अपने हौंसले को कम नहीं होने दिया। नीरज के हौंसले और संघर्ष की कहानी बेसिक शिक्षा विभाग के जरिए उच्चस्तर तक पहुंची। सर्व शिक्षा अभियान ने यूनीसेफ के सहयोग से नीरज की संघर्ष गाथा पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का निर्णय लिया है। बालिका शिक्षा के जिला समन्वयक मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि एसएसए व यूनीसेफ दिल्ली की टीम यहां पांच सितंबर को पहुंच रही है। बा स्कूल की पूर्व छात्रा नीरज पर एक डाक्यूमेंटरी फिल्म शूट होनी है। जिसका रिहर्सल होना है। इसके बाद डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस डाक्यमेंटरी फिल्म के माध्यम से अन्य बालिकाओं को प्रेरित किया जाएगा ताकि वह भी हौसले के साथ पढ़ाई पूरी कर मान सम्मान की जिंदगी जी सके।
सियासी मैदान में उतरी राजेश्वरी
बीसलपुर तहसील के गांव नवदिया सितारगंज निवासी राजेश्वरी का जीवन भी संघर्ष के बीच बीता। पिता रामेश्वरदयाल ने गांव में बांस की बिक्री व मजूदरी कर परिवार को पाला। राजेश्वरी ने कक्षा पांच तक की पढ़ाई प्राइमरी स्कूल में पूरी की। उसके बाद उसकी पढ़ाई छूट गई। बेटी के सपनों को टूटता देख उसका दाखिला कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बीसलपुर में कराया। जहां उसने कक्षा आठ तक पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के प्रति लगन देख परिवार ने भी साथ दिया और उसने एसकेजेपी इंटर कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास की। परिवारीजनों के मुताबिक राजेश्वरी की दो बहनें विवाहित है। चार भाई अब दिल्ली में रहकर नौकरी करते हैं। इस बीच राजेश्वरी का विवाह हो गया। राजेश्वरी की आगे बढ़ने की चाह यहां नहीं थमी। शाहजहांपुर के गांव मैनी स्थित ससुराल से उसने ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ा, लेकिन मात्र चार वोट से उसकी हार हुई। आज राजेश्वरी के परिवार को अपनी बेटी पर नाज है।
मनीषा ने बॉ स्कूल का सहारा पाकर जारी रखी पढ़ाई
बीसलपुर के मोहल्ला दुबे निवासी मनीषा कश्यप की कहानी भी नीरज के जैसे ही है। मनीषा के कैंसर पीड़ित पिता राकेश कश्यप घर छोड़ कर चले गए। ऐसे में मनीषा समेत उसकी चार बहनों की जिम्मेदारी मां गायत्री पर आ पड़ी। कमाई का साधन न होने पर मनीषा ने घर पर रहकर ही पढ़ाई की। पढ़ाई के प्रति लगन को देख मां गायत्री ने मनीषा का दाखिला बा स्कूल बीसलपुर में करा दिया। जहां वर्ष 2015 में उसने कक्षा आठ की परीक्षा पास की। मनीषा के परिवारीजनों ने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर मनीषा का दाखिला कक्षा नौ में नहीं कराया जा सका। इस बीच मां ने अपने मायके वालों के सहयोग से उसकी शादी की बात शुरू कर दी। अपने सपनों को टूटता देख मनीषा ने मां से अभी शादी न करने की गुहार लगाई। परेशान मनीषा ने बा स्कूल जाकर पूरी बात बताने के साथ पढ़ने की इच्छा जताई। पढ़ाई के प्रति लगन देख बा स्कूल की वार्डेन ने अन्य स्टाफ के सहयोग कर उसका दाखिला कक्षा नौ में एक कॉलेज में करा दिया। कक्षा नौ व दस की पढ़ाई मनीषा ने बॉ स्कूल के छात्रावास में रहकर ही की। जुझारू मनीषा ने हाईस्कूल परीक्षा विज्ञान वर्ग से 65 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। वर्तमान में वह कक्षा 11 की पढ़ाई कर रही है। विज्ञान व गणित की निशुल्क ट्यूशन बा स्कूल की पार्ट टाइम टीचर द्वारा दी जा रही है। बकौल मनीषा पढ़ लिखकर वह सरकारी नौकरी हासिल करना चाहती है। ताकि मां व अन्य बहनों की मदद कर सके।