पीलीभीत। गोशालाओं के निर्माण में बजट किस तरह खपाकर गुणवत्ता को दरकिनार किया गया, इसकी हकीकत कितनापुर गांव में 11.20 लाख की लागत से बनी गोशाला बयां कर रही है। इस गोशाला में अभी गोवंशीय पशु पहुंचे एक महीना नहीं बीता, मगर नांद में दरारें पड़ गई हैं। कई जगह गड्ढे भी हो गए हैं। दीवारों पर भी काई जमने लगी है।
पंचायती राज विभाग एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत बीसलपुर ब्लॉक क्षेत्र के कितनापुर गांव के बड़गवां मजरा में गोशाला बनाई गई है। अन्य ग्राम पंचायतों में बनी बदहाल गोशालाओं की तरह यहां भी एक टिनशेड और कमरा बनाने में ही 11.20 लाख रुपये खर्च हो गए। गोशाला परिसर में तार फेंसिंग अलग से मनरेगा योजना के तहत करवाई गई। एक तरफ बजट के हिसाब से निर्माण आधा भी नहीं है, दूसरी ओर इसमें गुणवत्ता को लेकर भी ध्यान नहीं दिया गया। इसकी हकीकत यह है कि गोशाला के भवन की दीवारें अभी से जर्जर होने लगी हैं। गोशाला की नांद की गहराई न के बराबर है। नांद में जगह-जगह अभी से दरारें पड़ गई हैं। गोशाला का फर्श भी उखड़ने लगा है। फर्श में कई जगह गड्ढे हो गए हैं। यह हाल तब है जब पशुओं को पहुंचे गोशाला में एक महीना भी नहीं बीता है। पूरे परिसर में ऊंची घास खड़ी है। गोशाला का एक हिस्सा घास के बीच दलदलनुमा है। दीवारों पर काई जमना शुरू हो गई। गोशाला की देखरेख करने वाले दो कर्मचारी हैं। इन्हें भी अभी तक मानदेय नहीं मिला। कर्मचारियों के अनुसार उनसे कहा गया था कि मनरेगा से ही उन्हें 201 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान दिया जाएगा।
नल उखड़कर चला गया, मगर गड्ढा नहीं भरवाया
गोशाला परिसर में एक इंडिया मार्का हैंडपंप लगा था। नल खराब होने पर उखड़वा दिया गया था। मगर अभी तक उस गड्ढे को नहीं भरवाया गया। गायें परिसर में ही घूमती रहती हैं। गड्ढे में गिरकर घायल होने का भी डर रहता है।
पानी की हौदी में डाला जा रहा गोबर
गोशाला में पानी की हौदी बनी हुई है। मगर, कहीं पर भी पानी भरा हुआ नहीं दिखा। हौदी में गोबर समेत अन्य गंदगी के ढेर लगे थे। जब कर्मचारियों से पूछा गया तो उनका कहना था कि उन्हें तो कूड़ा डालने के लिए ही कहा गया। जब यह पूछा कि पशु पानी कहां पीने जाएंगे तो उन्होंने नजदीक से गुजर रही देवहा नदी और तालाब का हवाला दे दिया।
परिसर की घास को मान लिया हरा चारा
वर्तमान में इस गोशाला में 36 गोवंशीय पशु मौजूद हैं। मगर, इनके खाने के पुख्ता इंतजाम गोशाला में नहीं थे। नांद देखकर लग रहा था कि मानो अभी गोशाला में पशु पहुंचें ही न हो। नांद में भूसा ही नहीं था। भूसा-चारा का स्टॉक देखा तो थोड़ा सा गंदा भूसा कमरे में पड़ा था। परिसर में विचरण करते हुए पशु घास चर रहे थे। हरे चारे की कोई व्यवस्था नहीं थी। कर्मचारियों ने भी हरा चारा न होने की बात स्वीकारी। कहा कि पशु गोशाला परिसर की घास खा लेते हैं। वरना घास बड़ी होने पर उसे काटकर चारा बना लेते हैं।
दवाओं के नाम पर एक गोली नहीं
गोवंश के खाने-पीने की तरह गोशाला में इलाज को लेकर भी हालात ठीक नहीं हैं। पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। पशु चिकित्सक कभी कभार ही गोशाला पहुंचते हैं। पशुओं के इलाज के लिए दवाओं के स्टॉक के नाम पर गोशाला में एक गोली तक नहीं मिली।
ग्रामीण बोले-बाढ़ आई तो डूब जाएगी गोशाला
ग्राम पंचायत कितनापुर के मजरा दगीपुर बड़गवां में बनी गोशाला के बराबर से देवहा नदी गुजर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बारिश के समय नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है। बाढ़ आने पर हालात भीषण हो जाते हैं। जिस स्थान पर गोशाला बनी है, वहां भी अंदर आबादी की तरफ पानी पहुंचता है। इस बार अभी कुछ राहत हैं। मगर बाढ़ आई तो पूरी गोशाला ही डूब जाएगी।
कितनापुर के बड़गवां में गोशाला निर्माण में अनियमितताएं और खान-पान की व्यवस्था सीवीओ को मौके पर भेजकर दिखवाई जाएगी। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। -श्री निवास मिश्र, सीडीओ