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देवीपुरा गोशाला: जब खुद की नौकरी पर बन आई, तब फौज लगाकर सफाई कराई

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पीलीभीत। वन्य जीव प्रेमी और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा बनवाई गई देवीपुरा गोशाला की बदहाल अव्यवस्थाओं पर अफसरों ने तब सुध ली, जब स्वयं उनकी नौकरी पर बन आई। तब न बजट की दिक्कत आई, न ही किसी अन्य तरह की। फजीहत के बाद अपनी इज्जत और नौकरी बचाने के लिए आनन-फानन में प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। गोशाला में 100 से ज्यादा लेबर लगाकर साफ-सफाई कराई। जानवरों को हरा चारा ले आया गया। इतना ही नहीं, गायों को लाइन से खड़ा कराकर हरा चारा खिलाया भी गया। गोशाला के अंदर खड़ंजे का भी सुधार कराया गया। एसडीएम और तहसीलदार कराए जा रहे काम की निगरानी में जुटे रहे।
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मुख्यालय से पांच किमी दूर माधोटांडा रोड पर स्थित देवीपुरा गोशाला में 15 गायों की मौत का खुलासा करते हुए अमर उजाला ने सात अप्रैल के अंक में गोशाला की बदहाली की तस्वीर सामने रखी थी। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और सुल्तानपुर की सांसद मेनका गांधी और स्थानीय सांसद वरुण गांधी ने फोन पर ही अफसरों की तगड़ी क्लास लगाई। तमाम अफसरों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई। तब जाकर सिस्टम हरकत में आया। शुक्रवार को एसडीएम सदर अविनाश मौर्य, तहसीलदार विवेक मिश्रा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके गर्ग पूरी टीम के साथ देवीपुरा गोशाला पहुंचे। वहां 100 से अधिक मजदूर लगाकर साफ-सफाई शुरू कराई। परिसर में फैली कीचड़ और दलदल को जेसीबी मशीन से हटवाया गया। इसके अलावा मिट्टी और ईंटें मंगाकर गोशाला के अंदर खड़ंजे का सुधार कराया गया। पशुओं के खाने-पीने की व्यवस्था में भी सुधार दिखा। फटकार लगने के बाद तो बजट की कमी का रोना रोने वाले अफसरों ने गायों केे सूखे भूसे के बजाए हरा चारा ही खिलाया। पानी भी साफ-सफाई करके पिलाया गया।
दो दिन पहले तक गोशाला परिसर के अंदर दलदल ओर कीचड़ में गोवंशीय पशु रहने को मजबूर थे। मृत जानवरों के शव भी उन्हीं के बीच पड़े सड़ रहे थे। गायों को खाने को सूखा भूसा और पीने को कीड़े वाला गंदा पानी दिया जा रहा था।
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सीएम के बरेली होने का भी पड़ा असर
सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को बरेली में थे। गाय सीएम के एजेंडे मे प्रमुखता से शामिल हैं। ऐसे में अफसरों ने किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती क्योंकि हर किसी को डर था कि जरा सी लापरवाही में उनकी नौकरी को खतरा हो सकता है। जब खुद पर बन आई तो चंद घंटों में ही सिस्टम ने बजट न होने का रोना रोए बिना गोशाला का सुधार कराने दौड़भाग शुरू कर दी। गोशाला के अंदर हर काम दुरुस्त किया जाने लगा। अब तक तमाम कामों मेें बजट न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ा जा रहा था। मगर शुक्रवार को चंद घंटों में ही बजट का भी इंतजाम हो गया और सब काम भी कराए जाने लगे। अगर, यही काम सिस्टम पहले अपनी जिम्मेदारी निभाते हए करता तो गोशाला में इस कदर अव्यवस्थाएं हावी न होतीं। न ही इतनी गायों की भूख और बीमारी से मौत होती।
सोशल साइट्स पर छाया रहा मामला, मुख्यमंत्री को भी ट्वीट
देवीपुरा गोशाला में गायों की दुर्दशा का मामला शुक्रवार को सोशल साइट्स पर छाया रहा। पशु प्रेमी प्रशासन की लापरवाही पर सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते रहे। वहीं गोवंश संरक्षण के नाम पर बजट के बंदरबांट पर भी वन्य जीव प्रेमियों ने अफसरों पर निशाना साधा। कुछ लोगों ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री और शासन के अधिकारियों से भी गोशाला के अंदर गायों की दुर्दशा की शिकायत की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पॉलिथीन खाने से निकली मौत की वजह
देवीपुरा गोशाला में प्रशासन ने 10 पशुओं के मरने की बात ही स्वीकार की थी। हालांकि सूत्रों ने इनकी संख्या 15 से अधिक बताई। बृहस्पतिवार को मृत गायों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अधिकारियों ने गायों की मौत पॉलिथीन से होना बताया। इसमें भूख और बीमारी से मरने की बात न होने का दावा किया। रिपोर्ट में कहा गया कि 10 में चार पशुओं की मौत पेट में पॉलिथीन इकट्ठा होने और अन्य की उम्र अधिक होने से हुई।
देवीपुरा गोशाला में 10 पशुओं के शव मिले थे। इसमें चार गायों की पेट में पॉलिथीन जमा होने और अन्य की उम्र अधिक होने से मौत हुई है। गोशाला में लेबर लगाकर सफाई कराई गई। अंदर खड़ंजे में भी सुधार कराया जा रहा है। खानपान को लेकर भी खामियों को दूर किया है। - डॉ. एके गर्ग, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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