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फाइलों में गुम हो गई कूड़ा निस्तारण योजना

Sat, 29 Aug 2015 11:33 PM IST
Pilibhit
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शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद तेजी से शुरू की जा चुकी है, लेकिन इससे पहले उन जुनूनी समस्याओं पर भी गौर करना होगा, जो इस शहर के लिए एक बदनुमा दाग से कम नहीं। मसलन कूड़े को ही लें तो यहां करीब सवा दो लाख की आबादी वाले इस शहर को कूूड़ा करकट से निजात दिलाने को कूड़ा निस्तारण योजना बनाई गई थी। जिसको लेकर भूमिकी खरीदारी के भी प्रयास हुए, लेकिन अब यह मामला फाइलों में ही गुम होकर रह गया है।
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हर दिन निकला है आठ मैट्रिक टन कूड़ा
शहर में कूड़ा निस्तारण को करीब 34 अस्थाई डलावघर बने हुए हैं। पालिका के सफाई कर्मचारी 27 वार्डों से कूड़ा उठाकर इन्हीं अस्थाई डलावघरों में डालते हैं। हर रोज इन अस्थाई डलावघरों से करीब आठ मैट्रिक टन कूड़ा उठाकर देवहा नदी की तलहटी में डाला जा रहा है।

कई जगह हुई तलाश, फिर भी नहीं बनी बात
कूड़ा निस्तारण की समस्या से निजात पाने को नगरपालिका प्रशासन ने जनवरी माह से स्थाई डलावघर बनाने को लेकर भूमि तलाश की कवायद शुरू की थी। इसके लिए गांव खरुआ, प्यास, मीरगंज चौराहा और नाकूड़ में भूमि की तलाश की गई। पालिका प्रशासन ने नाकूड़ को शहर से करीब होने के चलते सबसे उपयुक्त भी माना था, लेकिन विरोध के चलते मामला टांय टाय फिस्स हो गया।
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वेस्ट ट्रीटमेंट को आई कंपनी का भी अतापता नहीं
गुजरात की कदम इन्वायरमेंटल कॅन्सलटेंट कंपनी ने गत वर्ष मई माह में डेनमार्क की एक कंपनी के सहयोग से शहर में वेस्ट मैनेजमेंट प्रक्रिया शुरू की थी। कंपनी के विशेषज्ञों ने दो बार यहां पहुंचकर सैंपलिंग भी की। विशेषज्ञों का कहना था कि सैंपल एनालिसिस के बाद वेस्ट ट्रीटमेंट और कूड़े से बिजली उत्पादन आदि की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा, लेकिन यह मामला भी आया गया हो गया।

प्रपोजल बनाकर भेजा गया है
कूड़ा निस्तारण को लेकर कई जगह चिन्हित की गई थी, लेकिन इन सभी जगहों पर कुछ न कुछ दिक्कतें आ रही थी। अब ललौरीखेड़ा के समीप एक भूमि का चिन्हित किया गया, इसका प्रपोजल भी बनाकर भेजा चुका है।
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प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष नगरपालिका परिषद
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