पीलीभीत सहकारी गन्ना समिति के सामने टनकपुर मार्ग पर स्थित खाद गोदाम की जमीन से पड़ोस में बने मैकूलाल अस्पताल की ओर से रास्ता बनाने का प्रयास किया गया था। मामला कोर्ट में होने के बाद इसमें कुछ दिनों पहले यह बात सामने आई कि तत्कालीन चेयरमैन विनोद कुमार ने अस्पताल के मालिक से समझौता कर कोर्ट में समझौता नामा पेश कर दिया जिसमें अस्पताल को रास्ता निकलने की अनुमति दी गई थी। इसकी जानकारी होने पर 16 जून को समिति पदाधिकारियों ने बैठक कर विरोध जताया था साथ ही पूर्व चेयरमैन के खिलाफ धोखाधड़ी की तहरीर सुनगढ़ी पुलिस को दी थी। शनिवार देरशाम रास्ता बनाने की संभावना पर बोर्ड के सदस्य पुन: एकत्र हो गए शाम को एडीएम से मिलकर शिकायत की थी। रविवार को चेयरमैन पति कुछ संचालकों एवं सचिव के साथ पुलिस अधीक्षक से मिले। संचालकों का कहना था कि अस्पताल के लोग जबरन रास्ता बनाने का प्रयास कर रहे हैं जिन्हें रोका जाना चाहिए साथ ही पूर्व चेयरमैन के खिलाफ दी गई तहरीर पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए। एसपी ने संचालकों को जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पूर्व चेयरमैन ने भेजा नोटिस का जवाब
16 जून को बोर्ड से प्रस्ताव के बाद समिति सचिव ने पूर्व चेयरमैन को नोटिस भेजा था। इस पर पूर्व चेयरमैन विनोद कुमार ने अपना जवाब समिति को भेज दिया है। इसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने एवं उनके पिता पोथीराम गंगवार ने चेयरमैन रहते समिति की सेवा की है वह इसकी संपत्ति को खुर्दबुर्द करने की सोच भी नहीं सकते। उन्हें समझौते का अधिकार नहीं है और न ही उन्होंने कोई समझौता किया है। जो समझौता नामा कोर्ट में लगाया गया है उसमें उनका फोटो लगाकर फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।
सवाल: तो क्या कोर्ट में पेश हुआ फर्जी समझौतानामा
जमीन विवाद को लेकर कोर्ट में चल रहे मुकदमे में जो समझौतानामा पेश किया है उसमें पूर्व चेयरमैन के फोटो व हस्ताक्षर को एक अधिवक्ता द्वारा प्रमाणित किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि यदि इस पर पूर्व चेयरमैन हस्ताक्षर नहीं हैं तो क्या इन्हें गलत तरीके से प्रमाणित किया गया है।