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लापरवाही से गड़बड़ाता जा रहा है पूरा सिंचाई सिस्टम 

Sat, 14 May 2016 10:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
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नहर - फोटो : pilibhit, beureu
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अंग्रेजी हुकूमत ने प्रदेश में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी देने के लिए शारदा बैराज बनाया गया था। बैराज से नहरें निकालकर प्रदेश को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन उस समय कमीशनखोरी का बोलबाला नहीं था। आज स्थिति यह है कि सिंचाई से जुड़ा पूरा सिस्टम ही डगमगाया चल रहा है। सिंचाई के लिए पानी की किल्लत हर साल बढ़ती जा रही है, जो आने वाले समय में प्रदेश के करीब डेढ़ दर्जन जनपदों के किसानों के लिए एक बड़े खतरे की घंटी है। 
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ब्रिटिशकाल में अंग्रेजी हुकूमत ने यूपी की लाखों एकड़ असिंचित भूमि को सिंचित करने को शारदा नदी पर बैराज बनाकर वनबसा से शारदा मुख्य नहर को निकाला था। वनबसा से 45 किमी दूर जनपद के वाइफरकेशन में उसकी टेल को डालकर यहां से प्रदेश को पानी देने को दो महत्वपूर्ण नहरें हरदोई ब्रांच और खीरी ब्रांच को निकाला था। हरदोई ब्रांच की रायबरेली तक लंबाई 249 किमी और खीरी ब्रांच की लंबाई 198 किमी रखी गई थी। इसके अलावा शारदा मुख्य नहर से ही बीसलपुर ब्रांच और निगोही ब्रांच को भी निकाला गया, जिसकी लंबाई क्रमश: 74 व 95 किमी है।

नहरों में डिस्चार्ज मापने के 
लिए बरती जाती थी पारदर्शिता
अंग्रेजी हुकूमत के अभियंताओं ने शारदा मुख्य नहर की खुदाई में काफी पापड़ बेले थे। खुदाई के दौरान बड़े पैमाने पर मजदूरों की मलेरिया सहित कई अन्य बीमारियों से मौतें हुई थीं। नहरों में पानी का डिस्चार्ज मापने को पंसाल (गेज) नहर के हेड से काफी दूरी पर बनाए गए थे। आज पंसाल तो मापी जाती है, लेकिन अंग्रेजों द्वारा बनाई गई पंसाल और अन्य यंत्र या तो गायब हो गए या फिर क्षतिग्रस्त हो गए। उसके स्थान पर हेड के नजदीक ही पंसाल बना ली। इन दिनों नहर में पानी कितना बह रहा है, अभियंता दूरभाष से ही इसकी रिपोर्ट ले रहे हैं।
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नहरों में खरीफ और रवी फसलों को सिंचाई को पानी देने को रोस्टर बनता था, जिसमें अधीक्षण अभियंता पंचम मंडल बरेली, अधीक्षण अभियंता षष्टम मंडल सिंचाई कार्य लखनऊ समेत विभिन्न खंडों में तैनात छह अधिशासी अभियंताओं के संयुक्त हस्ताक्षर से रोस्टर बनता था। अब रोस्टर तो बनता है, लेकिन पुराने सभी आंकड़े धराशायी हो गए हैं। मात्र कागजों में ही रोस्टर दिखाई देता है। 

पहले गुणवत्ता पर होता था पूरा फोकस
पहले नहरों में अंतिम छोर तक पानी पर्याप्त मात्रा में पहुंचे, इस पर पूरा ध्यान दिया जाता था। यदि कहीं फालतू पानी पहुंचता था तो अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई होती थी, लेकिन आज कमीशनखोरी की आदत लग चुकी है। नहरों में सिल्ट निकालने के नाम परञ घपले कर मरम्मत के नाम पर खूंटा बल्ली लगाई जा रही है। इसी के चलते नहरों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। 

सिंचाई की कमी पूरी करने को बना था डैम
सिंचाई की कमी पूरी करने को शारदा डैम प्रथम पंचवर्षीय योजना में बनाया गया था,जिसमें पानी भरने की क्षमता 624 फीट और डेड लेबल 603 फिट था, लेकिन डैम सिल्ट से पटने के चलते इसकी क्षमता घटकर 622 और डेड लेबल 608 से 610 फिट हो चुका है।

सिस्टम गड़बड़ाने से दरकिनार किया रोस्टर
सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने दो साल पहले अपने जनपद दौरे के दौरान शारदा बैराज को नए सिरे से बनाने की बात कही थी। शारदा डैम का भी प्रोजेक्ट मांगा गया था। अब शारदा मुख्य नहर से पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते अभियंता रोस्टर को ताक पर रखकर कभी हरदोई ब्रांच तो कभी खीरी ब्रांच को पानी दे रहे हैं।

शारदा मुख्य नहर से ऊपर से पानी की कमी के चलते पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है, लेकिन अभी नहरों से सिंचाई के लिए कृषि फसलें प्रभावित न हों, किसानों को पानी की भरपाई की जा रही है।
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- पीके तिवारी, सहायक अभियंता, हेडवर्क्स खंड 
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