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Pilibhit News: पालिका की कर रसीदों में फर्जीवाड़ा, सोलर लोन के लिए बना डाला फर्जी दस्तावेज

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इसी फर्जी रशीद से होती रही ठगी।
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एक ही रसीद नंबर की दो प्रतियां सामने आने से खुला मामला कई और रसीदें संदेह के घेरे में, पुलिस से की शिकायत, बैंकों को सत्यापन के निर्देश
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पीलीभीत। शहर में नगर पालिका की गृह एवं जलकर की रसीदों में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने से पालिका प्रशासन में खलबली मच गई है। यूपी नेडा की आन-ग्रिड सोलर पैनल योजना के तहत बैंक से लोन स्वीकृत कराने के लिए पालिका की कथित फर्जी कर रसीदों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही रसीद संख्या की दो अलग-अलग प्रतियां अलग-अलग लोगों के नाम से सामने आई हैं। इसके अलावा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों की कई अन्य रसीदें भी संदेह के घेरे में हैं। मामला सामने आने के बाद पालिका प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और सुनगढ़ी थाने में शिकायत भेजकर एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कराई गई है।
शहर में करीब 26,500 आवासीय और 950 व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। इन संपत्तियों से नगर पालिका गृह एवं जलकर की वसूली करती है। कर जमा करने के बाद जारी होने वाली रसीद संपत्ति के कर भुगतान का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। ऐसे में यदि इन्हीं रसीदों में हेरफेर कर उनका इस्तेमाल बैंक लोन अथवा अन्य सरकारी योजना में किया गया है तो मामला गंभीर हो सकता है।
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कथित फर्जीवाड़े का मामला एक ऐसी रसीद सामने आने के बाद पकड़ में आया, जिसकी संख्या समान होने के बावजूद उस पर अलग-अलग लोगों के नाम और विवरण दर्ज हैं। सोशल मीडिया पर रसीद संख्या 73 की दो प्रतियां सामने आई हैं। एक प्रति पवन कुमार अग्रवाल के नाम की है, जबकि दूसरी संजय मिश्रा के नाम की बताई गई है। दोनों रसीदों में दर्ज विवरण अलग-अलग हैं।
मामले की जानकारी पालिका अधिकारियों तक पहुंचने के बाद मूल अभिलेखों से रसीदों का मिलान कराया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर पालिका के रिकॉर्ड में संबंधित नंबर पर अन्य नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। इससे रसीदों के फर्जी होने की आशंका और गहरा गई है। संवाद

बागुलशेर खां से शेर मोहम्मद क्षेत्र तक संदिग्ध रसीदें
एक रसीद के बाद अब शहर के बागुलशेर खां और शेर मोहम्मद क्षेत्र की पांच से सात अन्य संदिग्ध कर रसीदों की जानकारी भी सामने आई है। इन रसीदों की भी जांच की जा रही है। पालिका अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि ये रसीदें वास्तव में पालिका के अभिलेखों से जारी हुई हैं या किसी स्तर पर इनकी प्रतियां तैयार कर उनमें बदलाव किया गया।
जांच में रसीद नंबर, संपत्ति का विवरण, कर निर्धारण, जमा धनराशि और संबंधित कर अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है।

सोलर पैनल योजना में बैंक लोन के लिए इस्तेमाल
मामला यूपी नेडा की आन-ग्रिड सोलर पैनल योजना से जुड़ा है। योजना के तहत कुछ पंजीकृत वेंडर उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगवाने के साथ बैंक से लोन स्वीकृत कराने की प्रक्रिया में भी मदद कर रहे हैं। इसी दौरान पालिका की कर रसीदों के संदिग्ध इस्तेमाल का मामला सामने आया।
यदि बैंक लोन के लिए ऐसी रसीदों का इस्तेमाल किया गया है जो पालिका के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं हैं या जिनमें वास्तविक विवरण से छेड़छाड़ की गई है, तो यह दस्तावेजों के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।

बड़े व्यावसायिक भवनों का कर कम करने की भी आशंका
मामले में कुछ बड़े व्यावसायिक भवनों के गृह एवं जलकर को निर्धारित मानकों के विपरीत कम किए जाने की आशंका भी जताई गई है। यदि जांच में यह सही पाया जाता है तो नगर पालिका के राजस्व को नुकसान पहुंचने का मामला भी सामने आ सकता है।
ऐसे में अब सिर्फ संदिग्ध रसीदों की जांच ही नहीं, बल्कि संबंधित संपत्तियों के कर निर्धारण और कर जमा करने की प्रक्रिया की भी जांच जरूरी मानी जा रही है।

बैंकों को भेजा पत्र, पहले कराएं सत्यापन
मामला सामने आने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने संबंधित बैंकों को भी पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि यूपी नेडा की सोलर योजना के तहत लोन स्वीकृत करने से पहले आवेदकों की ओर से प्रस्तुत नगर पालिका की कर रसीदों का मूल अभिलेखों से मिलान कराया जाए।
पालिका की ओर से यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि संदिग्ध अथवा फर्जी रसीद के आधार पर कोई बैंक ऋण स्वीकृत न हो सके। रसीद के वास्तविक होने की पुष्टि पालिका रिकॉर्ड से कराने के बाद ही दस्तावेज को स्वीकार करने के लिए कहा गया है।
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कर संग्रहकर्ताओं ने पुलिस को दी शिकायत
ईओ संजीव कुमार ने बताया कि कर संग्रहकर्ता अमित कुमार, महेश कुमार और अन्य की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई है। सुनगढ़ी थाने में शिकायती पत्र भेजा गया है और एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस स्तर से जांच के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि संदिग्ध रसीदें कहां से तैयार हुईं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
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