पीलीभीत। प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर सचिव ने एक राजमिस्त्री से 15 हजार रुपये ठग लिए। कई दिनों तक उसे आवास मिलने का झांसा देता रहा। बाद में जब आवास न मिलने पर पीड़ित ने अपने दिए रुपये वापस मांगे तो सचिव ने गाली गलौज की और धमकी देकर भगा दिया। सीडीओ ने शिकायत मिलने पर मामले की जांच के आदेश किए हैं।
बीसलपुर के मोहल्ला दुबे निवासी रूबी ने सीडीओ को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उसने प्रधानमंत्री आवास के लिए लॉकडाउन लगने से पहले आवेदन किया था। उसके पति जैवीर राजमिस्त्री हैं। कुछ समय बाद पंचायत सचिव ने पति से मुुलाकात की। यह आश्वासन दिलाया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभांवित कराया जाएगा। इसके एवज में 15 हजार रुपये भी ले लिए। लॉकडाउन में काम धंधा बंद था। बावजूद इसके जैसे-तैसे इंतजाम करके रुपये दिए गए थे। यही नहीं सचिव लगातार आवास मिलने का झांसा देता रहा। एक माह तक अपने घर पर सचिव ने मजदूरी भी कराई। मजदूरी के रुपये तो बाद में दे दिए गए, लेकिन आवास के नाम पर वसूले गए रुपये नहीं लौटाए।
आवास का लाभ भी नहीं मिल सका। इस पर वह लगातार चक्कर लगाता रहा। एक दिन सचिव के घर गए तो वह झगड़े पर आमादा हो गया। आरोप है कि गाली गलौज करते हुए धमकी देकर उसे भगा दिया गया। परिवार की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पीड़ित ने मामले में न्याय की गुहार लगाई है।
पहले पात्रता सूची में शामिल हुए, अब कट गए कई लोगों के नाम
प्रधानमंत्री आवास को लेकर एक और बड़ी समस्या इन दिनों बनी हुई है। पहले जारी की गई सूची में कई लोगों के नाम थे। उन्हें अब जल्द आशियाना मिलने की उम्मीद जागी थी। मगर अब दर्जनों ग्रामीणों के नाम सूची से काट दिए गए हैं। अधिकांश में वजह आवेदन में मोबाइल नंबर न पड़ा होना बताई गई है। पिपरिया अगरू, बेटरी गांव के कई ग्रामीणों ने इसकी शिकायत सीडीओ से की। इससे पहले प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष आशुतोष दीक्षित ने भी अफसरों से मामले की शिकायत की थी। अब इस मामले में भी अफसर पड़ताल कराने में जुटे हैं।
प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर सचिव द्वारा सुविधा शुल्क वसूलने का मामला संज्ञान में आया है। इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। मामले की जांच कराने को कहा गया है। अगर आरोप सही हुए तो कार्रवाई तय है। पात्रों के सूची से नाम कटने की भी शिकायतें मिली हैं। इसे भी दिखवाया जा रहा है। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ