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Pilibhit News: इल्हाम की तलाश में जुटी चार टीमें, 22 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ

Tue, 10 Mar 2026 11:59 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की एक करोड़ धनराशि के घोटाले का मुख्य आरोपी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम शम्सी 22 दिन बाद भी पुलिस के हाथ नहीं आ सका। चार टीमें उसकी लोकेशन खंगाल रही हैं। अफसरों के दावे में फेल साबित हो रहे हैं। उधर, प्रशासन की जांच की रफ्तार भी सुस्त है। करीब एक माह बाद अफसर इल्हाम और लेनदेन से जुड़े 35 खातों की जानकारी ही जुटा सका है। कोषागार और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के जिम्मेदार मौन धारण किए हैं।
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डीआईओएस कार्यालय में वर्ष 2015 से संबद्ध चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम शम्सी की पत्नी अर्शी खातून के बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में फरवरी में एक करोड़ का लेनदेन पाया गया था। पहले तो कई दिन तक जिम्मेदार इसे छिपने में लगे रहे। खुद के कार्यालय का पत्र वायरल होने के बाद भी सीडीओ अनभिज्ञता जताते रहे। घोटाले के मामले ने तूल पकड़ा तो बैंक की रिपोर्ट के बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने जांच के निर्देश दिए। मामले की पर्ते खुलीं। लेनदेन करीब छह साल से होना पाया गया।
इल्हाम के इर्द-गिर्द घूमती जांच, अन्य कर्मियों पर अब तक नहीं आई आंच
डीआईओएस कार्यालय से हुए करोड़ों के लेनदेन में कई डीआईओएस और बाबू की भूमिका भी सामने आई। कोषागार के अधिकारी और लिपिक की लापरवाही भी जगजाहिर हुई। डीएम के निर्देश पर डीआईओएस राजीव कुमार ने 15 फरवरी को कोतवाली में इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी अर्शी खातून के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने एक सप्ताह बाद पत्नी को शहर के पंजाबियान क्षेत्र में स्थित उसके मायके से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। मगर इल्हाम तक नहीं पहुंच सकी है। उधर, प्रशासन के जांच की आंच डीआईओएस और कोषागार के कर्मियों तक नहीं पहुंची है।
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इल्हाम के पकड़े जाने से खुल सकती हैं कई परतें
मुख्य आरोपी इल्हाम शम्सी की गिरफ्तारी न होने से मामले में अभी कई राज दबे हुए हैं। माना जा रहा है कि इस पूरे गोलमाल में शामिल अन्य अधिकारी और कर्मचारियों की कारगुजारी भी सामने आ सकेगी। हालांकि दर्ज रिपोर्ट में इल्हाम की ओर से विभाग के किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी के शामिल न होने की बात का जिक्र किया गया था।

लेनदेन में कई की भूमिका संदिग्ध, कार्रवाई फिर भी नहीं
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आने के बाद डीएम के निर्देश पर जांच का दायरा बढ़ाया गया। इसमें सामने आया कि जिन मदों के रुपये इल्हाम ने अपने पत्नी समेत अन्य खातों में भेजे। वह लिपिकों के कोड का प्रयोग और तत्कालीन डीआईओएस से लेकर वर्तमान डीआईओएस के हस्ताक्षर के बाद ही कोषागार भेजे गए। बिना किसी जांच के कोषागार की ओर से भी सरकारी धनराशि को निजी खातों में भेजा जाता रहा। जांच में लापरवाही उजागर होने के बाद भी अबतक किसी पर कार्रवाई नहीं हो सकी। इससे प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।



विवेचना में गंभीरता बरती जा रही है। बैंक से रिकॉर्ड लिए जा रहे हैं। इसके साथ ही आरोपी को पकड़ने के प्रयास भी तेज किए गए हैं। - सत्येंद्र कुमार, कोतवाल
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