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चार ऐतिहासिक दरवाजों में  तीन हो चुके हैं जमींदोज

Sun, 17 Apr 2016 10:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
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धरोहर। - फोटो : pilibhit, beureu
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ऐतिहासिक विरासतों के सानिध्य में जहां पीलीभीत की संस्कृति फली फूली, लेकिन कभी यहां सभ्यता की पालनहार बनीं यह ऐतिहासिक धरोहरें आज खुद अपनी काया देखकर आंसू बहा रही हैं। इन रोगी हुई कायाओं ने सियासत के अलंबरदारों की ओर भी टकटकी लगाई, लेकिन मदद न मिलने से इन धरोहरों की काया जर्जर होने के साथ जमींदोज होती जा रही है। इसे विडंबना ही कहा जाए कि इन धरोहरों की सेहत सुधारने को न तो कोई जनप्रतिनिधि आगे आया है न ही कोई संगठन।
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यह है जिले की धरोहरें
मुगलकाल फिर उसके ब्रिटिश काल के दौरान जिले में तमाम इमारतों का निर्माण कराया गया, जो पीलीभीत की शान के रूप में जानी जाने लगी। वर्ष 1897 तक पीलीभीत जिला बरेली का एक उपखंड था। जिसकी तहसील जहानाबाद थी। शहर में रोहेला सरदार हाफिज रहमत खां द्वारा शहर में दिल्ली की जामा मस्जिद की तर्ज पर जामा मस्जिद, गौरी शंकर मंदिर द्वार, ऐतिहासिक बरेली दरवाजा, जहानाबाद दरवाजा समेत चार भव्य दरवाजों का निर्माण कराया था। इसके अलावा ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बनवाया गया घंटाघर भी यहां है।

एक-एक कर जमींदोज होतीं धरोहरें
कभी जनपद की पहचान मानी जाने वाली धरोहरों की काया न सिर्फ बेजान बल्कि जर्जर हो चुकी है। हाफिज रहमत खां द्वारा बनवाए गए ऐतिहासिक दरवाजे कभी पीलीभीत को एकसूत्र में बांधे नजर आते थे, लेकिन आज की तारीख में यह खंडहर के सिवा कुछ नहीं। बरेली दरवाजा 19 सितंबर 1998 को जमींदोज हो गया। तहसील दरवाजा भी करीब तीन दशक पूर्व छह चुका है। स्टेशन रोड दरवाजा भी अपना अस्तित्व खो चुका है। प्रशासन और नगर पालिका की अनदेखी के चलते एक मात्र बचा जहानाबाद दरवाजा भी ढहने के कगार पर पहुंच चुका है।
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अलसुबह पूरे शहर को उठाता था घंटाघर
ब्रिटिश हुकूमत में बना घंटाघर जनपद की धरोहरों में गिना जाता था। बुजुर्गों के मुताबिक यह घंटाघर कभी पूरे शहर को अल सुबह उठाया करता था। प्रशासन की अनदेखी के चलते इसमें लगा पीतल का एक वजनी घंटा व घड़ियों का सामान गायब हो गया। सालों बाद कुछ माह पूर्व नगर पालिका ने इसके जीर्णोंद्वार का बेड़ा उठाया। साफ सफाई के साथ मरम्मत व रंग रोगन कराया। अब तीन चार माह से घड़ियां दुरुस्त करने वाले कारीगर का इंतजार चल रहा है।

ऐतिहासिक धरोहरों की देखरेख का जिम्मा जिला प्रशासन व पुरातत्व विभाग पर है। नगर पालिका द्वारा सालों से बंद पड़े घंटाघर का चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है। संभवत: जल्द ही यह सुचारू रुप से काम करने लगेगा।
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- प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका
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