बाइरफकेशन क्षेत्र में पानी से बिजली तैयार करने की कवायद चार दशक पहले भी शुरू की गई थी। जिसके तहत विद्युत विभाग ने पावर हाउस बनाने के लिए स्थान का चयन भी कर लिया था, लेकिन यह योजना कागजों में ही गुम होकर रह गई थी। जनपद में एक बार पुन: बिजली उत्पादन को लेकर कवायद शुरू हो चुकी है।
जिले में बिजली उत्पादन को लेकर बिजली विभाग के आला अफसरों ने जो तीन-तीन मेगा वाट उत्पादन के प्रोजेक्ट तैयार किए हैं, उसमें एक माधोटांडा रजवाहा के निकट हरदोई ब्रांच पर, जबकि दूसरा प्रोजेक्ट चित्तरपुर के निकट और तीसरा प्रोजेक्ट डूडा पुल के निकट का बनाया गया है। ऐसे में इस पूरी नहर पर तीन बिजली उत्पादन इकाई बनाने की योजना है।
सिंचाई विभाग में ऊहापोह की स्थिति
सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना था कि हर जगह बाईपास चैनल बनाना मुश्किल होगा। जब किसानों की डिमांड नहीं होती है तो नहर को बंद करना पड़ता है। बिजली उत्पादन के लिए यदि पानी लगातार दिया जाएगा तो यह पानी कहां जाएगा। इसके अलावा शारदा सागर डैम के हेड से निकलने वाली सबसीडरी ब्रांच, जिस पर डेढ़ मेगावाट बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट बनाया गया है। इस नहर के हेड पर फाटक खराब पड़े हैं। सिंचाई विभाग पहले ही इन सबकी मरम्मत को 18.75 करोड़ की लागत का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेज चुका है। ऐसे में यहां पर भी जब तक मरम्मत का भेजा गया प्रोजेक्ट मंजूर नहीं होता, तब तक बिजली उत्पादन करना टेढ़ी खीर होगा।
पहले भी हुई थी बिजली उत्पादन की कवायद
हरदोई ब्रांच नहर पर करीब चार दशक पहले माधोटांडा रजवाहा के निकट बिजली बनाने की कवायद शुरू हुई थी। उस दौरान बिजली घर, बाईपास चैनल बनाने समेत सभी औपचारिकताएं भी बिजली विभाग ने पूरी कर ली थीं, लेकिन सिंचाई विभाग से वहां भी अंतिम समय में एनओसी नहीं मिलने की वजह से मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। इस बार भी सिंचाई विभाग के अफसरों के इस दौरे में यही अंदेशा दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर यदि सरकार का इस पर दबाव नहीं हुआ तो यह मामला भी ठंडे बस्ते की भेंट चढ़ जाएगा।