पूर्व मंत्री एवं सपा नेता डा. विनोद तिवारी ने गुरुवार को सपा को टाटा कह दिया। भाजपा प्रदेश कार्यालय पर पार्टी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या के समक्ष अपने पुत्र अक्षत शिवांग तिवारी और सपा युवजन सभा के जिला उपाध्यक्ष सुधांशु मिश्रा के साथ भाजपा में शामिल हो गए। श्री तिवारी ने सपा नेताओं पर उपेक्षा का आरोप लगाते इसे घर वापसी करार दिया है।
डा. तिवारी की गिनती जिले के कद्दावर ब्राह्मण नेताओं में की जाती है। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले डा. तिवारी जिले की पूरनपुर विधान सभा सीट से वर्ष 1980 और 1984 में कांग्रेस टिकट पर तथा वर्ष 2002 में भाजपा टिकट पर विधायक चुने गए। भाजपा शासनकाल में उन्हें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री भी बनाया गया। इसके अलावा वह सहकारिता प्रकोष्ठ और विश्व आयुर्वेद परिषद (उत्तर प्रदेश) के प्रदेश के अध्यक्ष भी रहे। सहकारिता क्षेत्र के विभिन्न पदों पर भी उन्हें रहने का मौका मिला। किन्हीं कारणों के चलते तीन साल पहले उन्होंने सपा की सदस्यता ग्रहण की थी। उनका कहना है कि जिले में सपा को मजबूत करने में उन्होंने अपनी खासी ऊर्जा लगाई, लेकिन उन्हें सपा नेताओं ने तरजीह नहीं दी बल्कि उपेक्षा की। वह सपा में जाकर घुटन महसूस कर रहे थे। उनके समर्थकों ने भी उनसे घर वापसी को कहा। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व अब उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपेगा उसे बखूबी निभाएंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही जिले से और तमाम लोग सपा छोड़ भाजपा का दामन थामेंगे।