पीलीभीत। सेंट्रल एकेडमी ऑफ स्टेट फॉरेस्ट सर्विस के 45 अधिकारियों का अध्ययन दल एक सप्ताह के पीलीभीत भ्रमण के बाद बुधवार सुबह देहरादून रवाना हो गया। भ्रमण के अंतिम दिन मंगलवार रात दल ने पीलीभीत की विशिष्ट पहचान बांसुरी निर्माण प्रक्रिया को नजदीक से देखा और इसके वादन का आनंद लिया।
समापन सत्र चूका में आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि पीटीआर के डीएफओ मनीष सिंह रहे। इस दौरान पीलीभीत की तीन पहचान बासमती, बांसुरी और बान पर प्रकाश डाला और बताया कि अब बाघ भी पीलीभीत की एक नई पहचान बन चुका है। बांसुरी निर्माता शमशाद नवी ने निर्माण की विधि विस्तार से बताई। वहीं युवा वादक विशेष वाजपेयी ने राग मल्हार और दरबारी समेत कई रचनाएं प्रस्तुत कर मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। शमशाद नवी ने डीएफओ मनीष सिंह और दल प्रमुख अमलेंदु पाठक को बांसुरी भेंट की। दल ने पीलीभीत की व्यवस्थाओं की सराहना की और पुनः आने की इच्छा जताई। इस मौके पर रेंजर सहेंद्र यादव भी मौजूद रहे।